"महाभारत को अनेक महान् योद्धाओं ने जिया, कोई जीता, कोई हारा। इतिहास लिखने वालों ने भी इसे किसी एक पक्ष के नजरिए से ही देखा। लेकिन क्या किसी ने उस कुरुक्षेत्र को उसके असली, निष्पक्ष रूप में देखा ? यह पुस्तक इतिहास के उसी सबसे बड़े और अनसुने दृष्टिकोण की संवाहक है। यह गाथा है महाभारत के उस एकमात्र, तटस्थ और परम साक्षी की, जिसे आज दुनिया 'श्री खाटू श्याम' के नाम से पूजती है। वह तो बस एक 'निष्पक्ष साक्षी' था, जिसकी आँखें दोनों पक्षों के अहंकार, प्रतिशोध, अधर्म और विवशता को बिना किसी पूर्वग्रह के देख रही थीं।
जहाँ बाकी सब युद्ध लड़ रहे थे, वहाँ बर्बरीक महाकाल के उस परम सत्य को साक्षात् घटित होते देख रहे थे। द्वापर के उसी मौन गवाह के खाटू धाम में अवतरित होने और कलयुग का स्वामी बनने तक की यह यात्रा बेहद रहस्यमयी, ओजस्वी और चमत्कारी है। यह पुस्तक केवल एक पौराणिक कथा नहीं है, बल्कि महाभारत की एक ऐसी अनकही, गूँजती हुई दास्तान है, जो आपके भीतर छिपे संशयों को मिटाकर एक असीम और अटूट विश्वास का संचार कर देगी।"