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यह पुस्तक 'महाकुंभ' विश्व के सबसे बड़े मानवीय समागम के उन पहलुओं को उजागर करती है, जो केवल धार्मिक नहीं अपितु सामाजिक, आर्थिक और रणनीतिक भी है। पुस्तक में कुंभ के पौराणिक इतिहास, अटूट आस्था से लेकर अखाड़ों की अलौकिक दुनिया को विस्तार से बताया गया है, जिसने हजारों वर्षों से भारत को एक सूत्र में पिरोया है। कैसे मंथन से निकला अमृत आज भी करोड़ों भारतीयों की चेतना को पुनर्जीवित करता है।
महाकुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं अपितु भारतीय ज्ञान-परंपरा का जीवंत संकलन है। एक अस्थायी शहर (टैंट सिटी) को बसाना, जहाँ विश्व का सबसे बड़ा जनसमूह एकत्र होता है। इसका प्रबंधन कैसे सफल हुआ ? रियल टाइम 24×7, प्रशासनिक क्षमता कैसे स्थापित हुई ? देश-दुनिया के हर कोने से आए नागा साधुओं, कल्पवासियों, आम श्रद्धालुओं और आधुनिक पर्यटकों ने महाकुंभ को 'विविधता में एकता' का सबसे बड़ा मंच बना दिया।
कैसे महाकुंभ ने अरबों रुपए की अर्थव्यवस्था को गति दी। बुनियादी ढाँचे, पर्यटन एवं स्थानीय रोजगार के माध्यम से महाकुंभ आर्थिक समृद्धि का वाहक बना। आधुनिक दौर में मीडिया और सोशल मीडिया ने महाकुंभ की वैश्विक ब्रांडिंग कैसे की, पुस्तक में इसकी गहराई से समीक्षा है। स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा जमीन पर किए गए निस्स्वार्थ सेवा कार्यों और सामाजिक समरसता के प्रयासों को प्रमुखता से रेखांकित किया गया है।