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Lal Gulab   

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Author Mehrunnisa Parvez
Features
  • ISBN : 9788173155772
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information

  • Mehrunnisa Parvez
  • 9788173155772
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2011
  • 167
  • Hard Cover

Description

वह हतप्रभ होकर विमूढ़-सी रह गई। शरीर बर्फ की सिल्ली-सा ठंडा व बेजान पड़ गया था। बेटे के मन की आहट-भनक वह क्यों नहीं ले पाई? क्यों अपने कामों में इतना अधिक व्यस्त रही? बेटे ने चेन अपने लिए नहीं, किसी और के लिए माँगी होगी, यह विचार क्यों नहीं मन में आया? आँखों से अविरल अश्रुधारा बहती रही, उसका आँचल भिगोती रही। आखों के आगे की धुंध छँटी भी तो कब, जब बेटा नहीं रहा। बेटे के मन की दीवार पर कान लगाकर वह क्यों उसके भीतर का कुछ नहीं सुन सकी? बच्चे की भूख से तो माँ की छाती में दूध भर जाता है, फिर वह अपने बच्चों की जरूरतों को, आवश्यकताओं को क्यों नहीं समझ पाई? उसे लगा जैसे उसका पूरा शरीर काठ का टुकड़ा होकर रह गया है। शरीर की सारी चेतना शून्य हो गई है। शरीर जड़- सा हो चुका है। हाथ उठाने की भी शक्ति नहीं रही थी जैसे। मुँह से एक शब्द नहीं फूटा। गूँगे की तरह वह बस टुकुर-टुकुर देखती रह गई। पहले भी अंधकार था, पर इतना नहीं। अब तो जीवन में घुप्प काला अंधकार है चारों तरफ। वह कितनी भाग्यहीन, अभागिनी माँ थी! उसने अपना सिर झुका लिया। आँसू आँचल भिगोते रहे।
सुप्रसिद्ध लेखिका मेहरुन्निसा परवेज का नवीनतम कथा-संग्रह, जो भावना प्रधान होने के साथ-साथ संबंधों की ऊम्भा से अनुप्राणित है। इसमें संगृहीत कहानियों के अपने विविध अर्थ, मर्म एवं सरोकार हैं। इनमें वर्णित वात्सल्य, त्याग व समर्पण जैसे प्रेरक गुणों के साथ ही इसकी मार्मिकता मन के क्रसे को झंकृत करती है। ये सशक्त कहानियाँ क्सै जीवन की त्रासदियों को उकैरती हैं।

 

The Author

Mehrunnisa Parvez

आम नारी-जीवन की त्रासदियों को सहज ही कहानी का रूप देने में कुशल मेहरुन्निसा परवेज का जन्म मध्य प्रदेश के बालाघाट के बहेला ग्राम में 10 दिसंबर, 1944 को हुआ । इनकी पहली कहानी 1963 में साप्‍ताहिक ' धर्मयुग ' में प्रकाशित हुई । तब से निरंतर उपन्यास एवं कहानियाँ लिख रही हैं । इनकी रचनाओं में आदिवासी जीवन की समस्याएँ सामान्य जीवन के अभाव और नारी-जीवन की दयनीयता की मुखर उाभिव्यक्ति हुई है । इनको ' साहित्य भूषण सम्मान ' (1995), ' महाराजा वीरसिंह जू देव पुरस्कार ' (1980), ' सुभद्रा कुमारी चौहान पुरस्कार ' (1995) आदि सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है । कई रचनाओं के अन्य भाषाओं में अनुवाद भी हुए हैं । इनकी कुछ प्रमुख रचनाएँ हैं- आँखों की दहलीज, कोरजा, अकेला पलाश (उपन्यास); आदम और हब्बा, टहनियों पर धूप, गलत पुरुष,‌फाल्‍गुनी , अंतिम पढ़ाई, सोने का बेसर, अयोध्या से वापसी, एक और सैलाब, कोई नहीं, कानी बोट, ढहता कुतुबमीनार, रिश्ते, अम्मा, समर (सभी कहानी संग्रह) ।

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