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"कथकजगत् में इस नृत्य के विकास की चर्चा सदैव होती रही है। विद्वानों, विचारकों और अध्येताओं ने अपने-अपने स्तर पर कथक नृत्य के विकास संबंधी तथ्य प्रस्तुत किए हैं। यह पुस्तक भी कथक नृत्य के विकास हेतु किए जा रहे विचारों और प्रयासों की गतिशीलता तथा निरंतरता बनाए रखने का एक 'उद्देश्य' है।
कथक नृत्य के विस्तार की वैसे तो कोई सीमा नहीं है, परंतु मध्य भारत में स्थित छत्तीसगढ़ राज्य ने स्वतंत्रता के पश्चात् इस नृत्य के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है, जिसे संपूर्ण कलाजगत् के समक्ष प्रस्तुत करना आवश्यक है। निश्चित रूप से यह पुस्तक कलाजगत् के अध्येताओं, विचारकों तथा विशेष रूप से विद्यार्थियों के लिए लाभदायी सिद्ध होगी।"