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"जम्मू कश्मीर: आतंक पर विजय की शौर्यगाथा' एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी पुस्तक है, जो जम्मू कश्मीर में आतंकवाद के विरुद्ध समाज के साहस, बलिदान और संघर्ष की विजयगाथा को प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक कालानुक्रमिक जम्मू कश्मीर के आतंकवाद प्रभावित क्षेत्रों के सत्य एवं तथ्यपरक घटनाक्रम के कथानकों के माध्यम से लिखी गई है, जिसमें जीवंत घटनाक्रम और ऐतिहासिक तथ्य जो कि 'कश्यप मर्ग से कश्मीर घाटी तक' के प्रथम ऐतिहासिक आलेख से शुरू होकर आतंकवाद के विरुद्ध क्रमबद्ध संघर्ष और बलिदान की कहानियों को चित्रित करते हैं।
लगभग 80 कथानकों के साथ प्रकाशन जगत् में यह पहली पुस्तक होगी, जो जम्मू कश्मीर में आतंकवाद के विरुद्ध देशभक्त नागरिकों और जन नेताओं के सामूहिक, व्यक्तिगत संघर्ष और उनके बलिदानों को, प्राथमिक स्त्रोतों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुभवों के आधार पर देश और समाज के समक्ष प्रस्तुत करेगी।
यह कश्मीर के ऐतिहासिक अन्याय, संघर्ष, और देशभक्ति को उजागर करती है, साथ ही सभी समुदायों की आपसी एकता और पारस्परिकता का संदेश भी देती है। आज जम्मू कश्मीर में आए सकारात्मक परिवर्तन में इन बलिदानियों और समाज के योगदान को यह रचना गौरव के साथ प्रस्तुत करती है।"
रवींद्र जुगरान
जन्म : 29 दिसंबर, 1969।
सुपरिचित लेखक, पत्रकार, कवि और सामाजिक कार्यकर्ता। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक, हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयागराज से पत्रकारिता एवं जनसंचार में विशारद तथा योग प्रशिक्षक अनुसंधान केंद्र से योगाचार्य की उपाधि प्राप्त की है।
अनेक पुस्तकों के रचयिता, अनेक पत्र-पत्रिकाओं में लेख, कविता, कहानी आदि प्रकाशित होते रहते हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में जम्मू कश्मीर में दस वर्षों तक कार्य करते हुए देशहित और सामाजिक उत्थान के लिए अथक प्रयास किए। इस दौरान सामाजिक कार्य करते हुए अनेक बार आतंकवादियों के चंगुल में फँसने से बाल-बाल बचे।
अनेक पुरस्कारों से सम्मानित । वर्तमान में योगाचार्य, सामाजिक कार्यों का निर्वहण करते हुए पत्रकारिता एवं स्वतंत्र लेखन के साथ-साथ सत्यान्वेषण अनुसंधान के आध्यात्मिक अनुभव की साधना में रत हैं।
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