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"""तपस्या- कितना गहरा शब्द है यह समुद्र की तरह, और कितनी ऊँचाई लिये है यह पर्वत की तरह, निःस्तब्ध और शांत है यह आकाश की तरह, सबकुछ सहन करता पृथ्वी की तरह। तपस्या और तुम - एक शब्द, एक व्यक्तित्व हो। तुम्हारा हर शब्द एक आकार, एक व्यक्तित्व और एक चेतनामयी प्रतिमान बन जाता है। कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिनके पास बैठकर एक अनिर्वचनीय अनुभूति और आनंद मिलता है, एक अलग रिश्तों का एहसास होता है। तुम एक ही हो दोस्त!"" कहते-कहते लेखनी की आँखों में दर्प-सा आ गया।
- इसी पुस्तक से
समकालीनता की छाँव में पल्लवित इन कहानियों में आज के तत्त्वों और जीवन-मूल्यों का समावेश है। समाज के दर्द और व्यक्ति की पीड़ा को व्यक्त करती ये कहानियाँ एक दर्पण की तरह हैं, जिसमें बदलते मूल्यों का अक्स है। कहीं पात्रों में एकाकीपन, उलझन, आशा-निराशा के बीच जूझती संवेदनाएँ हैं तो कहीं अपमान, असुरक्षा, दमन एवं शोषण से मुक्ति पाने की छटपटाहट है। कुल मिलाकर ये कहानियाँ रोचक, मनोरंजक एवं पठनीय हैं।"
शिक्षा : एम.ए. (हिंदी, राजनीति-शास्त्र), एम.एड., पी-एच.डी. (हिंदी)।
रचना-संसार : ‘अभिनव संग्रह’ (कविता-संग्रह), ‘रामचरित मानस और रघुवंश’ (एक तुलना), ‘यथार्थ की चादर’ (उपन्यास), ‘कोहरे में किलकारी’, ‘मुझे घर ले चलो’, ‘जिज्ञासु बच्चे’ (कहानी-संग्रह), ‘हिंदी का वैश्विक परिदृश्य, हिंदी : दशा और दिशा’, ‘प्रेमचंद की स्त्री विमर्श की कहानियाँ’, ‘प्रेमचंद के सांस्कृतिक मूल्यों की कहानियाँ’ (संपादन) एवं पत्र-पत्रिकाओं में अनेक रचनाएँ प्रकाशित।
विश्व हिंदी सम्मेलन 2015, भोपाल में सहभागिता। ग्रीन सिटी वेलफेयर सोसाइटी, हल्द्वानी की अध्यक्षा।
सम्मान-पुरस्कार : काव्य साधक सम्मान, डॉ. राम गोपाल चतुर्वेदी सम्मान, सारस्वत संभयार्चना पुरस्कार, साहित्य उपलब्धि सम्मान, उद्भव साहित्य सम्मान, साहित्य सेवा सम्मान, मानव सेवा सम्मान, साहित्य शिरोमणि सम्मान, उ.प्र. हिंदी संस्थान का पं. बद्री प्रसाद शिंगलू स्मृति सम्मान, सावित्री सक्सेना स्मृति साहित्य सम्मान एवं अन्य सम्मान।
पेशे से शिक्षिका, अध्ययन-अध्यापन, सामाजिक क्षेत्र में क्रियाशील।
कृतित्व : शोध प्रबंध शीघ्र प्रकाश्य।