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"यह पुस्तक महाभारत के अमर योद्धा बर्बरीक (खाटू श्याम) की जन्मस्थली महादेवशाल, पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड को प्रामाणिक संदर्भों के साथ प्रस्तुत करती है। प्राचीन ग्रंथों, स्थानीय लोककथाओं, पुरातात्त्विक संकेतों और पौराणिक यात्राओं के आधार पर लेखक ने सिद्ध किया है कि पांडवों की वन-यात्रा एवं भीम हिडिंबा प्रसंगों की जड़ें झारखंड की धरती में गहराई से जुड़ी हैं।
पुस्तक में पांडव-यात्रा मार्ग, महादेवशाल की असाधारण गाथा, बर्बरीक के तीन बाण, पांडवों एवं श्रीकृष्ण से उनका संवाद और हारे का सहारा बनने की दिव्य प्रक्रिया को जीवंत कथा शैली में प्रस्तुत किया गया है। धार्मिक आस्था, इतिहास, पर्यटन और लोकविश्वास, इन चारों के अद्भुत संगम के रूप में यह ग्रंथ पाठकों को आध्यात्मिक गहराई और सांस्कृतिक गर्व का अनुभव कराता है।"