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Garbhadhan Rahasya, Santan Badhak (PB)   

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Author P. RAM NARAYAN SHARMA
Features
  • ISBN : 9789380823331
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information

  • P. RAM NARAYAN SHARMA
  • 9789380823331
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2025
  • 272
  • Soft Cover
  • 350 Grams

Description

लेखक ने मनुष्य जीवन को पृथ्वी पर पूर्ण रूप से सार्थक बनाने हेतु ज्योतिष शास्त्र में उपलब्ध साधनों का सहारा लेते हुए पाठकों को यह बताने का प्रयास किया है कि ज्योतिषशास्त्र द्वारा किन-किन माध्यमों से मनुष्य के व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास किया जा सकता है एवं सुखी जीवन हेतु पृथ्वी पर उपलब्ध साधनों का उपयोग किया जा सकता है।

पुस्तक में साधारणतया 16 संस्कारों का वर्णन किया गया है तथा मुख्य रूप से गर्भाधान संस्कार की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है। तंत्र-प्राप्ति के उपायों का भी समावेश किया गया है; जैसे—व्रतों, स्तोत्रों, दान आदि की महिमा का वर्णन भी किया गया है, जो अधिक रोचक है। विशेष रूप से अशुभ मुहूर्तों को भी दर्शाया गया है, जिनसे बचना आवश्यक है।

इस ग्रंथ की यह विशेषता है कि गर्भ में आने से पूर्व ही ज्योतिषशास्त्र में दिए गए मुहूर्तों, जिसे ‘गर्भाधान मुहूर्त’ नाम से जाना जाता है, इसकी भी प्रशंसा की गई है एवं इसकी जानकारी अन्य 15 संस्कारों के साथ गर्भाधान संस्कार को विशेष महत्व देते हुए यहाँ उल्लिखित किया गया है।

The Author

P. RAM NARAYAN SHARMA

पं. राम नारायण शर्मा अपनी पैतृक विरासत के एक स्तंभ के रूप में प्रतिष्ठित हैं। इनको 31-08-2009 को ‘लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड’ एवं 03-09-2008 को ‘राष्ट्रीय गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
Jyotish Kendra, New Delhi द्वारा World Award for Excellence in Spiritual Education से सम्मानित किया गया, जो 2011 World Spiritual Parliament द्वारा वैज्ञानिक भविष्यवाणी एवं फ्यूचरोलॉजी के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदान किया गया।

लेखक ने 17 वर्ष की अवस्था में ही माता-पिता के दिवंगत होने के बाद भगवान विष्णु से साधना में अपने पूर्वजों की धरोहर—शास्त्रों के अध्ययन, मनन एवं व्यावहारिक रूप से कार्यान्वयन के रूप में—माँगी और उसके सफल संवाहक होने का वरदान प्राप्त किया (इस विषय में विस्तृत रूप से वर्णन वरदान-प्रसंग अध्याय में दिया गया है)। फलस्वरूप इन्होंने धर्म, ज्योतिष, कर्मकांड आदि अनेक ज्ञानवर्धक पुस्तकों का अध्ययन-मनन कर व्यावहारिक क्षेत्र में पदार्पण किया।

देश-विदेश के विभिन्न श्रेणियों के व्यक्तियों के कष्टों का निधान वेद, पुराण और शास्त्रों की रीति से करते हुए उन्हें समय-समय पर संतुष्ट किया। वे आज भी इस शास्त्र से जुड़ी संस्थाओं में अपनी पूर्ण भागीदारी प्रदान करते हैं। साथ ही रेडियो, दूरदर्शन आदि के माध्यम से भी इस शास्त्र के ज्ञान के प्रचार-प्रसार एवं समस्याओं के निधान हेतु प्रयासरत हैं।

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