पं. राम नारायण शर्मा अपनी पैतृक विरासत के एक स्तंभ के रूप में प्रतिष्ठित हैं। इनको 31-08-2009 को ‘लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड’ एवं 03-09-2008 को ‘राष्ट्रीय गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
Jyotish Kendra, New Delhi द्वारा World Award for Excellence in Spiritual Education से सम्मानित किया गया, जो 2011 World Spiritual Parliament द्वारा वैज्ञानिक भविष्यवाणी एवं फ्यूचरोलॉजी के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदान किया गया।
लेखक ने 17 वर्ष की अवस्था में ही माता-पिता के दिवंगत होने के बाद भगवान विष्णु से साधना में अपने पूर्वजों की धरोहर—शास्त्रों के अध्ययन, मनन एवं व्यावहारिक रूप से कार्यान्वयन के रूप में—माँगी और उसके सफल संवाहक होने का वरदान प्राप्त किया (इस विषय में विस्तृत रूप से वर्णन वरदान-प्रसंग अध्याय में दिया गया है)। फलस्वरूप इन्होंने धर्म, ज्योतिष, कर्मकांड आदि अनेक ज्ञानवर्धक पुस्तकों का अध्ययन-मनन कर व्यावहारिक क्षेत्र में पदार्पण किया।
देश-विदेश के विभिन्न श्रेणियों के व्यक्तियों के कष्टों का निधान वेद, पुराण और शास्त्रों की रीति से करते हुए उन्हें समय-समय पर संतुष्ट किया। वे आज भी इस शास्त्र से जुड़ी संस्थाओं में अपनी पूर्ण भागीदारी प्रदान करते हैं। साथ ही रेडियो, दूरदर्शन आदि के माध्यम से भी इस शास्त्र के ज्ञान के प्रचार-प्रसार एवं समस्याओं के निधान हेतु प्रयासरत हैं।