₹450
"प्रस्तुत पुस्तक 'बिहार जनादेश 2025' बिहार की समकालीन राजनीति के जटिल और बहुआयामी परिदृश्य का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करती है। यह केवल एक चुनावी वृत्तांत नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, राजनीतिक पुनर्संरचना और जनचेतना के उभार की कहानी भी है। 1990 के दशक में जहाँ बिहार जातीय संघर्ष, हिंसा और 'जंगलराज' की छवि से जूझ रहा था, वहीं 2005 के बाद राज्य ने सुशासन, विकास और स्थिरता की दिशा में उल्लेखनीय परिवर्तन देखा।
इस पुस्तक में यह रेखांकित किया गया है कि कैसे बिहार ने आक्रामक पहचान की राजनीति को सीमित रखते हुए सामाजिक संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया। विशेष रूप से 2025 का जनादेश एक ऐतिहासिक मोड़ के रूप में उभरता है, जब लगभग 21 वर्षों बाद राज्य में एक नया अध्याय लिखा गया और वर्ष 2026 में पहली बार भारतीय जनता पार्टी के श्री सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने। यह परिवर्तन केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि जनमत की बदलती प्राथमिकताओं का संकेत भी है।
पुस्तक में जातीय समीकरणों, राजनीतिक गठबंधनों, चुनावी रणनीतियों, विपक्ष की संयुक्त मुहिम, मतदाता जागरूकता अभियानों और विकास बनाम पहचान की बहस जैसे महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई है। यह कृति बिहार की राजनीति को समझने के लिए एक सशक्त और प्रामाणिक संदर्भ प्रस्तुत करती है।"