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Yudhyasva Bharat   

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Author Narendra Shivaji Patel
Features
  • ISBN : 9789375739401
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information

  • Narendra Shivaji Patel
  • 9789375739401
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2026
  • 368
  • Soft Cover
  • 400 Grams

Description

"युध्यस्व भारत' अर्थात् हे भारत, युद्ध करो। श्रीमद्भगवद्गीता के प्रथम तीन अध्यायों के कुल 161 श्लोकों का सार इस खंड में समाहित है। कुरुक्षेत्र की रणभूमि में जब अर्जुन ने अपने ही परिजनों, गुरुजनों और मित्रों को सामने खड़ा देखा, तो वे गहरे विषाद और मोह में डूब गए। उन्होंने अपने शस्त्र त्याग दिए और भगवान् श्रीकृष्ण के समक्ष युद्ध न करने का निर्णय व्यक्त किया। तब भगवान् श्रीकृष्ण ने उन्हें आत्मा की अमरता, धर्म की महत्ता और निष्काम कर्म का उपदेश दिया।

उन्होंने अर्जुन को समझाया कि अपने कर्तव्य से विमुख होना उचित नहीं है, और धर्म की रक्षा के लिए कर्म करना आवश्यक है। अध्याय 2 के 18वें श्लोक का अंतिम उद्घोष 'युध्यस्व भारत' केवल अर्जुन के लिए नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है, जो अपने कर्तव्यों से विचलित होता है। यहाँ भारत संबोधन समस्त मानव समाज के लिए एक आह्वान है कि वह अपने धर्म और उत्तरदायित्व का निष्ठापूर्वक पालन करे।

इसी प्रकार अध्याय 3 के 19वें श्लोक का संदेश - 'सततं कार्यं कर्म समाचर' हमें यह सिखाता है कि बिना फल की इच्छा के निरंतर अपने कर्तव्यों का पालन करते रहना ही जीवन की सच्ची साधना है। यही निष्काम कर्म का मार्ग अंततः मनुष्य को परमात्मा की प्राप्ति की ओर ले जाता है।

इस प्रकार 'युध्यस्व भारत' केवल युद्ध का आह्वान नहीं, बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अपने कर्तव्य, धर्म और उत्तरदायित्व के प्रति जागरूक रहने का प्रेरक संदेश है।"

The Author

Narendra Shivaji Patel

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