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"वर्तमान राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन से भारत एक ऐसी शिक्षा-परंपरा की ओर मार्ग प्रशस्त करेगा, जिससे न केवल भारत व भारतीय ज्ञान-परंपरा की समृद्ध विरासत को संरक्षित एवं संवर्धित करने में सहायता मिलेगी, बल्कि वर्तमान समय में छात्रों को आधुनिक दुनिया के द्वंद्व को समझने के लिए तैयार करेगी। साथ ही मनुष्य के चारित्रिक निर्माण में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका रखती है।
भारतीय ज्ञान-परंपरा नैतिकता, अस्मिता, अस्तित्व और भावनात्मक समरसता आदि जैसे विचारों एवं सिद्धांतों से भारत तथा विदेश में रहने वाले लोगों में यह शिक्षा को विशिष्ट पहचान दिला सकती है। यह शिक्षा प्रणाली इतनी प्रासंगिक एवं उपयोगी है कि इससे भारतीय ज्ञान-परंपरा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का दिग्दर्शन होगा, जिससे भारतीय गौरवशाली अतीत से हमारा मस्तक गर्व से ऊँचा होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय ज्ञान-परंपरा के भविष्य के लिए एक महत्त्वपूर्ण उपकरण के रूप में अपनी सहभागिता सिद्ध करती है।"