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Bharatiya Gyan Parampara : Nirguniya Sant   

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Author Prof. Lalchand Ram
Features
  • ISBN : 9789375737940
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information

  • Prof. Lalchand Ram
  • 9789375737940
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2026
  • 152
  • Soft Cover
  • 200 Grams

Description

"भारतीय इतिहास का मध्यकाल गहन सामाजिक-धार्मिक और सांस्कृतिक उथल-पुथल तथा अद्वितीय नवजागरण का साक्षी रहा है। इस नवजागरण को भक्ति आंदोलन के नाम से जाना जाता है। भक्ति रूपी इस आंदोलन में संत कवियों ने अपनी रचनाओं और अपनी जीवन-शैली से साहित्य तथा समाज पर अमिट छाप छोड़ी। इन संतों ने धार्मिक उपदेश ही नहीं दिए, बल्कि एक समतामूलक समाज की नींव भी रखी। इस आंदोलन ने तत्कालीन साहित्य को एक नई दिशा प्रदान की और यह साहित्य हिंदी का स्वर्ण युग बन गया।

निर्गुण संतों की वाणियों का इतना प्रभाव था कि वर्तमान समाज में भी उनकी शिक्षाएँ और साहित्यिक विरासत भारतीय चिंतन-परंपरा का अभिन्न अंग बनी हुई हैं। असमानता पर आधारित इस शोषणकारी व्यवस्था के विरुद्ध उन्होंने जोरदार तार्किक आंदोलन चलाया। संतों ने एकमत से उद्घोषणा की कि ईश्वर की दृष्टि में सभी मनुष्य समान हैं। जन्म के आधार पर कोई असमान नहीं है और न ही इसके लिए कोई सार्वभौमिक एवं तार्किक आधार ही है।"

The Author

Prof. Lalchand Ram

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