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"भारत में सामाजिक नागरिक पहल का ऐतिहासिक सफरनामा' भारतीय समाज के भीतर विकसित उस जीवंत परंपरा का गहन, विचारोत्तेजक और मूल्य-आधारित अध्ययन प्रस्तुत करती है, जिसे सचिन कुमार जैन ने 'सामाजिक नागरिक पहल' कहकर संबोधित किया है। पुस्तक में प्राचीन भारतीय समाज से लेकर समकालीन भारत तक के ऐतिहासिक दौरों उत्तर-मौर्य काल, मध्यकाल, औपनिवेशिक युग, स्वतंत्रता आंदोलन और स्वतंत्र भारत में सामाजिक नागरिक पहलों की भूमिका का क्रमबद्ध विश्लेषण किया गया है। बुद्ध, कबीर, रैदास, गुरु नानक, जोतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, महात्मा गांधी और डॉ. बी. आर. अंबेडकर समेत तमाम प्रमुख व्यक्तित्वों के विचार और कार्य पुस्तक में सामाजिक चेतना के प्रतीक के रूप में उभरते हैं। यह पुस्तक सामाजिक नागरिक संस्थाओं को मात्र पंजीकृत संगठनों तक सीमित नहीं करती, बल्कि व्यक्ति की नैतिक चेतना, साहस और व्यवस्था को चुनौती देने की क्षमता को सामाजिक बदलाव की मूल शक्ति के रूप में रेखांकित करती है।
प्रस्तुत पुस्तक आधुनिक भारत में सामाजिक नागरिक पहलों के सामने उत्पन्न चुनौतियों को भी सामने रखती है और भारत के सामाजिक इतिहास की अब तक की यात्रा का ब्योरा देती है, जहाँ संघर्ष, करुणा, विचार और साहस मिलकर एक अधिक न्यायपूर्ण एवं मानवीय समाज की कल्पना रचते हैं।
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