₹300
"हृदय स्पंदन
जब हम 'समष्टि' से इतर भक्ति की तरफ आकृष्ट होते हैं, तब हमारे-आपके हृदयों में 'भक्ति रस' का निष्पादन होता है। ऐसे ही कुछ खास क्षणों में भक्तिरस का स्रोत कब मेरे अंदर फूट पड़ा, यह तो मैं भी नहीं जानती। बस इतना ही जानती हूँ कि विगत तीन सालों में ये भजन मेरे व्यक्तित्व के अभिन्न अंग बन गए हैं।
भजन-सम्राट् पद्मश्री अनूप जलोटा जी का आशीर्वाद पाने पर तो ये और भी पुष्पित-पल्लवित हो रहे हैं। यही नहीं, इन भजनों को जैसे ही आपका मधुर स्वर मिल जाता है, तब मानो ऐसा लगता है कि शरीर में आत्मा ने ही प्रवेश कर लिया हो !
प्रस्तुत सभी भजन अब आप सभी सनातन धर्मावलंबियों के लिए भक्ति रसधारा के रूप में प्रस्तुत हैं।"