सार्थक शुक्ला
दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी साहित्य के शोधार्थी हैं, जहाँ उनका अध्ययन आधुनिक हिंदी पत्रकारिता पर केंद्रित है।
पाञ्चजन्य, ऑर्गेनाइजर सहित पत्र-पत्रिकाओं में नियमित लेखन, जिनमें राष्ट्रीय हित, सांस्कृतिक विमर्श तथा नीति-निर्माण, युवा, खेल, जनजातीय समाज और समसामयिक मुद्दों पर केंद्रित अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं।
राजनंदिनी
वनस्थली विद्यापीठ में समाजशास्त्र विषय की शोधार्थी हैं, जहाँ उनका शोध भारतीय जनजातीय समाज, उसकी सामाजिक संरचनाओं और समकालीन चुनौतियों पर केंद्रित है। वे कमलज् सेवा फाउंडेशन की संस्थापक सदस्य हैं, जो जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, युवा, नारी सशक्तीकरण तथा सामाजिक जागरूकता हेतु कार्यरत है।
पाञ्चजन्य, ऑर्गेनाइजर सहित प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में उनके लेख नियमित रूप से प्रकाशित होते हैं।