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Author Prof. Kusumlata Kedia
Features
  • ISBN : 9788168021105
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information

  • Prof. Kusumlata Kedia
  • 9788168021105
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2026
  • 416
  • Soft Cover
  • 400 Grams

Description

"यह पुस्तक यूरोप एवं भारत के अज्ञात व अल्पज्ञात पक्षों को प्रकाश में लाती है। उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्व तो यूरोप था ही नहीं; क्रिस्टेनडम था। उक्त कालखंड को डार्क एजेज कहा गया, क्योंकि क्रिस्टेनडम के भयंकर अमानवीय कुकृत्य इतने लज्जाजनक हो गए कि तथाकथित यूरोपियों ने क्रिस्टेनडम को त्याग कर यूरोप को अपनाया। फिर भी अन्यान्य कारणों से यूरोप भी इस पूरे क्षेत्र को एक न कर सका। यूरोप बुरी तरह विभाजित एवं खंडित है, जबकि भारत की एकता यूरोपियों के लिए विस्मयकारी।

भारतीय आज कल्पना भी नहीं कर सकते कि यूरोपियों को 18वीं शताब्दी के आरंभ तक भोजन में कच्चा या अधपका मांस और कुछ स्थानीय सब्जियों का स्वादहीन सूप ही मिलता था। कोई आश्चर्य नहीं कि जब यूरोपियों का भारत व आसपास के क्षेत्रों से संपर्क हुआ, तो वे सर्वप्रथम बड़ी मात्रा में भारत से जहाजों में नमक भरकर ले गए। उन्हें मसालों, मेवों, चाय, कॉफी, तंबाकू आदि का कोई ज्ञान तक नहीं था। इसी प्रकार शुचिता की कोई परंपरा नहीं थी। खुली सड़क पर मलत्याग, मल न साफ करना, न नहाना आदि के कारण बड़ी संख्या में यूरोपीय लोग रोगों से मरते रहे। शिक्षा का भी घोर अभाव था। औद्योगिक क्रांति, भौगोलिक खोज, नेशन स्टेट, कॉलोनी आदि वाग्जाल सिद्ध होते हैं।

यूरोप के विपरीत भारत का अतीत जाज्वल्यमान रहा है। इस प्रकार यह पुस्तक अपने शीर्षक को सार्थक करती है। सभी विद्यानुरागियों के लिए यह पुस्तक अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।"

The Author

Prof. Kusumlata Kedia

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