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अपने ज्ञान को, अपने अनुभवों को और अपनी भावनाओं को भी, बहुतों से बॉटना अत्यंत ही आवश्यक एवं एक सुखद अनुभव है। इसलिए, अपनी काव्य रचना 'भँवर भावनाओं का' के द्वारा, कवि श्री आलोक मिचयारीजी का इसी दिशा की ओर यह एक प्रथम, व्यक्तिगत, सशक्त एवं संवेदनशील प्रयास है |
इन कविताओं से यह आभास होता है कि कवि ने इन कविताओं को नहीं रचा, बल्कि इन कविताओं ने उन्हें रचा है । साथ ही, ये कविताएँ किसी एक विषय पर केंद्रित नहीं, वरन् विविध और विभिन्न मुद्दों, घटनाओं, गहरे विचारों तथा व्यक्तियों से प्रभावित, प्रेरित, आनंदित या फिर द्रवित होकर भी रची णई हैं | अपनी कविताओं के माध्यम से, व्यक्तिगत अनुभूतियों के अलावा, आध्यात्मिक संस्मरण, प्राकृतिक आपदा, आतंकवाद एवं महामारी कोविड आदि से संबंधित मसलों पर भी कवि ने अपनी चिंतन तथा चिंताएँ व्यक्त की हैं-जो पढ़ने में काफी दिलचस्प, मधुर व मर्मस्पर्शी हैं