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Zindagi Ki Geometry | Inspiring Stories Books In Hindi   

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Author Shri K.P.S. Verma
Features
  • ISBN : 9789355625663
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information

  • Shri K.P.S. Verma
  • 9789355625663
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2025
  • 200
  • Soft Cover
  • 200 Grams

Description

"आम आदमी के स्तर पर बात करें तो विवेक का टकराव ही जीवन को अनिश्चितताओं से भर देता है और यह अनिश्चितता तब और बढ़ जाती है, जब हमको सही जानकारी से वंचित रखा गया हो, जब हमारे अपने ही समाज के समझदार लोगों के द्वारा सदियों से पाले जा रहे अंधविश्वासों से हम उबर नहीं पाते-शिक्षित होकर भी।

यदि हम पूर्वग्रहों से बाहर आ सकें, दूसरों के विचारों का खुले दिल से विश्लेषण करें और अपने विचारों से दूसरे लोगों को भी सच्चे मन से अवगत कराएँ एवं उनके अच्छे विचारों को ग्रहण करें तो उबाने वाली एकरसता नहीं, बल्कि समरसता आ सकती है समाज में, जो बड़ी बात होगी।

कहानी-संग्रह 'जिंदगी की ज्योमेट्री' की कहानियाँ अलग-अलग पृष्ठभूमि वाले लोगों के विवेक के एक अलग माहौल से, टकराव से उत्पन्न परिस्थितियों से जूझने की गाथाएँ हैं। कहीं कोई अपने विवेक के माहौल से टकराव के बाद टूट जाता है तो कहीं परेशानी की भट्ठी में तपकर और मजबूत होकर निकलता है। कहीं कोई बीच का रास्ता पकड़ लेता है, समझौता कर लेता है। माननीय संवेदना को स्पर्श करने वाली पठनीय कहानियों का संकलन।"

The Author

Shri K.P.S. Verma

जन्म 10 जनवरी, 1949 को उत्तर प्रदेश में एटा जिले के जलालपुर गाँव में हुआ। 1970 में मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग आई.आई.टी., रुड़की (तब रुड़की विश्व-विद्यालय) से और दो वर्ष बाद मेटलर्जी में ही आई.आई.टी., कानपुर से एम.टैक. किया। 1973 में बोकारो स्टील प्लांट में इंजीनियर और फिर 1981 में यू.पी.एस.सी. से चयनित होकर रेलवे में केमिस्ट ऐंड मेटलर्जिस्ट के पद पर नौकरी शुरू की। अनेक उच्च पदों पर काम करने के बाद आर.डी.एस.ओ., लखनऊ से 31 जनवरी, 2009 को कार्यकारी निदेशक पद से सेवा निवृत्ति ली।
लेखन और साहित्य में रुचि छात्र जीवन से ही थी। साहित्यिक अभिरुचि के चलते 1986-88 के बीच रेलवे के बंगलौर स्थित पहिया-धुरा कारखाने में राजभाषा सचिव का अतिरिक्त कार्यभार मिला। उसी समय रेल मंत्री का हिंदी विभाग में उच्चस्तरीय कार्य के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। 
सेवा निवृत्ति के बाद साहित्यिक अभिरुचि को गंभीर आयाम मिला और फेसबुक आदि में रचनाएँ नियमित रूप से प्रस्तुत करना प्रारंभ किया। यह पुस्तकाकार पहली कृति है।

 

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