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"भारतीय वास्तुशास्त्र पर केंद्रित यह पुस्तक महत्त्वपूर्ण ग्रंथों, जैसे विश्वकर्म प्रकाश, मानसार, भयमतं, समरांगण सूत्रधार आदि स्थापत्य के ग्रंथों से लिये गए अत्यंत उपयोगी सूत्रों पर आधारित है। इसमें भवन-निर्माण हेतु अत्यावश्यक लगभग 400 से अधिक श्लोक संकलित हैं जो भूमिपूजन तक की प्रक्रिया-भूमि का चयन, शुद्धि, योजना, वास्तुपुरुष मंडल, मर्म, द्वार स्थापना, विभिन्न प्रकार के गर्भ विन्यास, वास्तु दोष, उपाय आदि आदि के संदर्भमें सूत्रों की सरलार्थ सहित वैज्ञानिक व्याख्या की गई है।
खात, शिलान्यास आदि के सूत्रों में उपजी हुई भ्रांतियों को भी गौर करते हुए स्पष्ट रूप से उसकी अनिवार्यता एवं समय को स्पष्ट किया गया है। इसमें अत्यंत उपयोगी छोटे-छोटे सूत्रों जैसे प्लव, मर्म एवं द्वार वेध, विन्यास जैसे शंकु स्थापना, धातु, औषधि, रत्न (राहु, केतु विधि) आदि का जिन-जिन ग्रंथों में उल्लेख किया गया है, उन सबका विस्तृत और वैज्ञानिक वर्णन किया गया है।
विभिन्न प्राचीन ग्रंथों के उपयोगी और सारगर्भित सूत्रों को भी संकलित किया गया है, जो आज के युग में अत्यंत उपयोगी और प्रासंगिक है।"