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यह पुस्तक उत्तर प्रदेश की नदियों पर केंद्रित एक समग्र, सूक्ष्म एवं व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। पुस्तक सत्रह अध्यायों में विभक्त है। इसके अंतर्गत गंगा, यमुना, घाघरा, शारदा, गोमती, राप्ती, गंडक सहित प्रमुख और सहायक नदियों की उत्पत्ति, प्रवाह-तंत्र, जलग्रहण क्षेत्र, भूगर्भीय संरचना एवं मौसमी प्रवाह का विश्लेषण किया गया है।
पुस्तक के अध्यायों में न केवल प्रमुख नदियों का पृथक् विवेचन है अपितु बेलन, वरुणा, कर्मनासा, धसान इत्यादि स्थानीय नदियों की समसामयिक स्थिति तथा उनके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों को भी प्रस्तुत किया गया है। प्रत्येक अध्याय में संबंधित नदी के ऐतिहासिक और पौराणिक संदर्भों के साथ-साथ नदियों के अपवाह तंत्र के मानचित्रों, नवीनतम वैज्ञानिक आँकड़े, रिपोर्ट एवं वर्तमान स्थिति भी उद्धृत है। नदी प्रदूषण, जल संरक्षण, बाढ़ प्रबंधन और जल-विद्युत् परियोजनाओं पर केंद्रित विश्लेषण अद्यतन वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित है।
प्रोफेसर (डॉ.) रवीन्द्र नाथ तिवारी प्राचार्य, प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय आदर्श विज्ञान महाविद्यालय, रीवा (म.प्र.) के साथ-साथ म.प्र. भोज (मुक्त) विश्वविद्यालय रीवा केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक हैं। 250 शोध-पत्र एवं आलेख विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित; 23 शोधार्थियों का मार्गदर्शन; 10 पुस्तकें प्रकाशित; अनेक सम्मानों से अलंकृत ।
डॉ. ब्रह्मानंद शर्मा की 3 पुस्तकें तथा 19 शोध-पत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित। कई भूवैज्ञानिक शोध जर्नल्स के आजीवन सदस्य ।
आशीष कुमार मिश्रा भूविज्ञान के शोधार्थी हैं। 2 पुस्तकें प्रकाशित। विभिन्न 10 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठियों में भाग लिया तथा 4 शोध-पत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित ।
आदित्य सिंह बघेल भू-विज्ञान के शोधार्थी हैं। 20 विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठियों में भाग लिया तथा 4 शोध पत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित। कुल 4 पुस्तकें प्रकाशित ।