Prabhat Prakashan, one of the leading publishing houses in India eBooks | Careers | Events | Publish With Us | Dealers | Download Catalogues
Helpline: +91-7827007777

Ummeed: Manushya Zinda Hai   

₹350

In stock
  We provide FREE Delivery on orders over ₹1500.00
Delivery Usually delivered in 5-6 days.
Author Dr. Sachchidanand Joshi
Features
  • ISBN : 9789375736967
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information

  • Dr. Sachchidanand Joshi
  • 9789375736967
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2026
  • 112
  • Hard Cover
  • 150 Grams

Description

"संस्कृतिकर्मी, कवि, लेखक एवं नाटककार डॉ. सच्चिदानंद जोशी द्वारा लिखा गया उनका नया नाटक। उनके तेवर और शैली में लिखे गए, इस नाटक में विभाजन के कई वर्षों के बाद भी देश में होने वाले सांप्रदायिक दंगों के चलते होने वाले नुकसान और कभी खत्म न होने वाले दर्द को बयाँ किया गया है।

नाटक में एक-दूसरे से गुँथे हुए, दो दौर एक साथ चलते हैं।

एक दौर आज का और एक देश के विभाजन की विभीषिका का, जो इतिहास की सबसे दुःखद घटनाओं में से एक है और जिसमें भयावह मानव विस्थापन और जबरन पलायन की व्यथा शामिल है।

लेखक के अनुसार इन किस्सों को याद रखना जरूरी है, क्योंकि बँटवारे का इतिहास, सिर्फ हिंसक वारदातों की तारीख नहीं है। इसमें हमदर्दी है, इनसानियत के तमाम किस्से हैं और सबसे बड़ी बात उम्मीद है। बहुत से लोगों ने पागलपन के उस दौर में भी इनसानियत और दोस्ती को जिंदा बचाए रखा था। जो उस दर्द में भी नई उम्मीद का एक अंकुर बो गया था।

मौजूदा दौर में भारत की एकता को बनाए रखने के लिए एक जरूरी पेशकश 'उम्मीद : मनुष्य जिंदा है'।"

The Author

Dr. Sachchidanand Joshi

सच्चिदानंद जोशी
जन्म : 9 नवंबर, 1963
पत्रकारिता एवं जनसंचार शिक्षा के क्षेत्र में अपने प्रदीर्घ अनुभव के साथ विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं में कार्य। कलात्मक क्षेत्रों में अभिरुचि के कारण रंगमंच, टेलीविजन तथा साहित्य के क्षेत्र में सक्रियता। पत्रकारिता एवं संचार के साथ-साथ संप्रेषण कौशल, व्यक्तित्व विकास, लैंगिक समानता, सामाजिक सरोकार और समरसता, चिंतन और लेखन के मूल विषय। देश के विभिन्न प्रतिष्ठानों में अलग-अलग विषयों पर व्याख्यान। कविता, कहानी, व्यंग्य, नाटक, टेलीविजन धारावाहिक, यात्रा-वृत्तांत, निबंध, कला समीक्षा इन सभी विधाओं में लेखन। एक कविता-संग्रह ‘मध्यांतर’ बहुत चर्चित हुआ। पत्रकारिता के इतिहास पर दो पुस्तकों का प्रकाशन। प्रभात प्रकाशन से प्रकाशित पुस्तक ‘सच्चिदानंद जोशी की लोकप्रिय कहानियाँ’ को भी अच्छा प्रतिसाद मिला। बत्तीसवें वर्ष में विश्वविद्यालय के कुलसचिव और बयालीसवें वर्ष में विश्वविद्यालय के कुलपति होने का गौरव। देश के दो पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालयों की स्थापना से जुड़े होने का श्रेय। भारतीय शिक्षण मंडल केराष्ट्रीय अध्यक्ष।

 

Customers who bought this also bought

WRITE YOUR OWN REVIEW