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"आधुनिक युग में स्मार्टफोन ने जहाँ हमारी जिंदगी को आसान बनाया है, वहीं यह बच्चों के बचपन की मासूमियत और माता-पिता के साथ संवाद को भी धीरे-धीरे निगल गया है। बच्चे पुस्तकें पढ़ने के बजाय अपना ज्यादातर समय स्क्रीन पर बिता रहे हैं, जिससे बच्चों की याददाश्त और कल्पनाशक्ति कमजोर होती जा रही है। यही सच्चाई इस पुस्तक 'स्मार्टफोन भगाएँ, बचपन बचाएँ' का मूल विषय है, जो बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों तीनों के लिए एक चेतावनी और मार्गदर्शन का कार्य करेगी।
इस पुस्तक में अत्यंत सरल, संवेदनशील और प्रभावशाली भाषा में बताया गया है कि कैसे स्मार्टफोन की लत आजकल के बच्चों को खेल-कूद, रचनात्मकता और सामाजिकता से दूर कर रही है। लगातार स्क्रीन पर बिताए गए घंटे न केवल बच्चों की दृष्टि और उनकी कल्पनाशक्ति को सीमित कर देते हैं, बल्कि उन्हें मानसिक रूप से कमजोर भी बनाते हैं।
इस पुस्तक में अनेक उदाहरण, शोध और वैज्ञानिक तथ्यों के माध्यम से यह सिद्ध किया गया है कि स्मार्टफोन की अति बच्चों के लिए एक घातक जहर बन चुकी है। इस पुस्तक में सिर्फ समस्या ही नहीं, इसके समाधान भी सुझाए गए हैं; जैसे परिवार में नो मोबाइल जोन बनाना, बच्चों के साथ संवाद बढ़ाना, प्रकृति और पुस्तकों से जुड़ाव बढ़ाना तथा डिजिटल अनुशासन का पालन करना इत्यादि। पुस्तक में अभिभावकों को यह भी समझाया गया है कि बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखना सिर्फ पाबंदी नहीं, बल्कि प्रेम और समझदारी का प्रतीक है।"