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"श्री राम नाथ ठाकुर लोकप्रिय राजनेता और समाजधर्मी, प्रखर वक्ता, विचारक व लोकसेवक हैं। अपने दीर्घ सार्वजनिक जीवन में उन्होंने समाज के सबसे नीचे तबके के संघर्ष और व्यथा को समझा और उनके जीवन स्तर को उन्नत करने के लिए उद्यत हुए। वे चाहे विधान परिषद् में रहे या संसद् में, उनके चिंतन में सदैव वे लोग रहे, जो लंबे कालखंड में भी निरंतर बुनियादी सुविधाएँ भी न पा सके। राम नाथ ठाकुर उनका स्वर बने, उनके अधिकारों के प्रबल पक्षधर बने और उन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने के कारक बने।
यह पुस्तक ऐसी प्रखर विभूति की संसद् में जनता के अधिकारों की प्रबल गूँज है।"