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"सनातन संस्कृति का अर्थ है, वह जो शाश्वत हो, जिसमें जड़त्व नहीं हो। यह पुस्तक सनातन संस्कृति के आलोक में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन के अनछुए पहलुओं से साक्षात्कार कराती है।
लेखक एवं प्रख्यात शिक्षाविद्, चिंतक और राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की सनातन संस्कृति और संसदीय विषयों से आरंभसे ही गहरी निकटता रही है। भारतीय राजनीति के वृहद परिप्रेक्ष्य में यह पुस्तक भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और अटल बिहारी वाजपेयी की उदात्त जीवन-दृष्टि से हमें रू-ब-रू कराती है। पुस्तक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा पर भी गहन चिंतन, मंथन है। इसी संदर्भ में यह पुस्तक अटलजी की राष्ट्रवादी दृष्टि का वैचारिक अनुष्ठान है।"