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रवींद्र किशोर सिन्हा की पत्रकारिता का मूलाधार राष्ट्रीयता का भाव है, जिसकी गूँज आद्योपांत इस संग्रह के संकलित लेखों में सुनाई पड़ती है। उन्होंने भारत को भारत के नजरिए से समझने-समझाने का प्रयास किया है, जो अत्यंत सराहनीय तो है ही, बोधप्रद भी है। इस दृष्टि का अभाव जो मीडिया में दिखता है, उसे ये लेख पूरा करते हैं। इस चिंतन का फलित रूप राजनीति, समाज, संस्कृति, धर्म, व्यवसाय, विदेश नीति, भाषा आदि अन्यान्य विषयों के निरूपण में दिखाई पड़ता है।
इस संग्रह में कुल 66 लेख संकलित हैं। ये कालक्रम की दृष्टि से राजग-दो की अवधि में घटी घटनाओं के विषयों से संबंधित हैं, लेकिन उसी तक सीमित नहीं हैं। हर लेख अपने आप में पूरा है। उस विषय को समग्रता से प्रस्तुत करता है। इसमें रोजमर्रा के जीवन में काम आने वाली पारिभाषिक शब्दावलियों की भरमार है। उन शब्दावलियों की परिभाषा भी बोधगम्य है।
प्रस्तुत पुस्तक में निहित विचार-संपदा को पढ़कर न केवल पत्रकारिता के अध्येता की शोधवृत्ति पैनी होगी, बल्कि वे एक मँझे हुए पत्रकार की लेखन-शैली से सीधे जुड़ा हुआ अनुभव करेंगे। इतना ही नहीं, हर पाठक पुस्तक को ‘समय का सच’ मानेगा।
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| अनुक्रम | |
| पुरोकथन—7 | 33. ट्रैक बढ़ाओ, तभी रुकेंगे हादसे—175 |
| अपनी बात—15 | 34. महिला विरोधी मुसलिम पर्सनल लॉ बोर्ड—180 |
| आभार—17 | 35. तो अपराध है असम में हिंदी गीत गाना—185 |
| 1. अंगदान आंदोलन की शक्ल ले तो बने बात—23 | 36. दलित और मुसलमानों को छलते मायावती-अखिलेश—189 |
| 2. कितनी मिले प्रेस को आजादी—28 | 37. दाऊद-छोटा शकील-नदीम कब जाएँगे जेल—194 |
| 3. अब डराते यू.पी. के शहर और सड़कें—33 | 38. दिल्ली से बाहर भी है भारत—200 |
| 4. अब नहीं बचेगा एटमी गुंडा पाकिस्तान—38 | 39. दीपावली पर मिलावटी मिठाइयाँ—205 |
| 5. अब नारों से नहीं काम से मिलता है वोट—43 | 40. दो शरीफ, दोनों बदमाश—209 |
| 6. आई.टी. सेक्टर में छँटनी से निकलेंगे नए अवसर—48 | 41. नेताजी को क्यों नापसंद करते रहे पंडित नेहरू—213 |
| 7. आर्थिक और वैश्विक स्तर पर छाप छोड़ता भारत—54 | 42. नोटबंदी—कश्मीर में अमन, माया-ममता दुःखी क्यों—219 |
| 8. एक हिंदू को मारते पाक में कठमुल्ला—59 | 43. कैशलेस भारत बढ़ेगा आगे—225 |
| 9. ओम पुरी और अदनान सामी का फर्क समझिए—64 | 44. पाक से निकलता सिंध-बलूचिस्तान—231 |
| 10. विश्व पर्व बनी दीपावली—69 | 45. फारूक साहब, जरा जुबान सँभालकर—235 |
| 11. कक्षाएँ पाँच और शिक्षक एक—74 | 46. बचा लो पाक के गैर-सुन्नियों को—239 |
| 12. बिहार कब खेलना सीखेगा—78 | 47. बचाओ काँवड़ियों को हादसों से—243 |
| 13. तीन तलाक : कब तक सहेंगी अत्याचार मुसलिम बहनें?—82 | 48. बिहार की बदहाली पर क्यों बात नहीं करते लालू—247 |
| 14. कश्मीर न बन जाए केरल—86 | 49. बिहार में मुरझाता ‘बचपन’—252 |
| 15. नहीं बचेंगे देश के दुश्मन—91 | 50. भारतवंशियों के साथ कितना खड़ा है भारत—256 |
| 16. केरल को बचाओ लेफ्ट और इसलामी आतंकवाद से—97 | 51. भीड़ के आगे बौनी पुलिस—261 |
| 17. कैसे मिलेगी यू.पी. के नौजवानों को नौकरी—101 | 52. मुसलिम समाज को मिले और हसीना फारस—266 |
| 18. कौन कत्ल कर रहा है बेटे-बेटियों का—105 | 53. राम भरोसे स्कूली शिक्षा—270 |
| 19. कौन कर रहा फतवों के बहाने सियासत—109 | 54. अब लगेगी बिल्डरों पर लगाम—274 |
| 20. कौन शामिल हो रहा है आतंकियों के जनाजों में?—114 | 55. रियो खेल—बड़ी खेल भावना या पदक जीतना?—279 |
| 21. कौन हैं वे, जिनका उठ जाता देश से भरोसा?—119 | 56. उत्तर प्रदेश : अपराधों की राजधानी—285 |
| 22. क्या नदियाँ मैली ही रहेंगी—123 | 57. रोक लगाओ रैगिंग पर—288 |
| 23. क्यों आता है किसी राज्य में निवेश?—128 | 58. वाजिब नहीं कनाडाई मंत्री का बयान—292 |
| 24. क्यों खास होगी मोदी की इजराइल यात्रा?—133 | 59. हिंदी हो चुकी अब विश्व भाषा—297 |
| 25. क्यों न मनाएँ इको फ्रेंडली त्योहार—138 | 60. सरकारी पैसे पर राहुल-प्रियंका की रईसी—303 |
| 26. खतरे में पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता—143 | 61. क्या अब मोटी तनख्वाहों के बाद काम करेंगे सरकारी बाबू—308 |
| 27. गऊ बिना अधूरा भारत—147 | 62. सर्जिकल स्ट्राइक : भारत की कूटनीतिक सफलता—312 |
| 28. गाँव में दारू-ही-दारू, दवा गायब —152 | 63. सार्क से निकाला जाए पाकिस्तान—317 |
| 29. बिहार : गुम होती बेटियों का दर्द—156 | 64. सीखना होगा राष्ट्रगान का आदर करना—321 |
| 30. गोवा-चीन पर नेहरू की अकारण जिद—160 | 65. पंडितजी से पहली मुलाकात—325 |
| 31. कट्टरपंथी इसलाम का रट्टू तोता जाकिर नाईक—165 | 66. दीनदयालजी का शाश्वत सनातन भारत ही है मोदीजी का ‘न्यू इंडिया’—332 |
| 32. सिंधु-साक्षी के बाद जीतीं मुसलमान औरतें—170 |
राजनीतिशास्त्र से स्नातक श्री सिन्हा ने अपने कॅरियर की शुरुआत एक पत्रकार के रूप में की। उन्होंने सन् 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में संवाददाता की भूमिका निभाई। सन् 1974-75 में लोकनायक जय प्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले छात्र आंदोलन पर ‘जन आंदोलन’ पुस्तक लिखी। उन्होंने 1974 में ‘सिक्योरिटी एंड इंटेलीजेंस सर्विसेज इंडिया’ की स्थापना की। एक निजी सुरक्षा विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने युनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका, यूरोप और चीन सहित कई देशों का भ्रमण किया और कई अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संस्थानों में महत्त्वपूर्ण पदों पर रहे। 1999-2004 के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठंबधन के शासनकाल में मानव संसाधन विकास मंत्रालय, विज्ञान व तकनीकी एवं समुद्री विकास मंत्रालय में सुरक्षा सलाहकार रहे। बहुआयामी प्रतिभा के धनी रवीन्द्र किशोर सिन्हा ने देहरादून में ‘द इंडियन पब्लिक स्कूल’ की स्थापना की। वे कई सामाजिक और कल्याणकारी संस्थाओं के अध्यक्ष हैं। फरवरी 2014 में भारतीय जनता पार्टी की ओर से राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए।