₹900
"भारत की ग्रंथ परंपरा अनुसंधान-परक है। भारत के स्वाभाविक विकास की दृष्टि से मौलिक शोध व अनुसंधान की प्रक्रिया पश्चिमी अथवा विदेशी दृष्टि पर आधारित रह गई है, जिसके दुष्परिणाम भी परिलक्षित हुए हैं। अनुसंधान का सामाजिक उत्थान एवं राष्ट्र की प्रगति में व्यापक योगदान है। किंतु यदि यह अनुसंधान परंपरा स्वदेशी आवश्यकताओं अथवा पद्धतियों पर आधारित न हों, तो देश-काल से विलग एक अवांछित यात्रा पर चल सकती है।
प्रस्तुत ग्रंथ इसी दिशा में अपने प्रकार का पहला प्रयास है, जो शोध एवं अनुसंधान के क्षेत्र में भारतीय शोध-अनुसंधान की प्रविधि एवं प्रयोग प्रस्तुत करता है। यह प्रयास भारतीय ग्रंथों में अनुसंधान की विशिष्ट परंपरा व प्रयोगों से परिचय कराता है। यह ग्रंथ विस्तार से चर्चा करता है कि भारतीय शोध-पद्धति के क्या प्रारूप हैं, किन भारतीय ग्रंथों में कौन-सी प्रविधि निर्दिष्ट है, भारतीय शोध-पद्धति के सामायिक प्रयोग कैसे किए जा सकते हैं तथा शोध उत्पादकता व सत्य के प्रतिपादन में शोध-पद्धति की वैज्ञानिकता के क्या प्रमाण हैं। अनेक भारतीय मनीषी और आचार्य, जैसे वेदव्यास, चरक, सुश्रुत, पाणिनि, आर्यभट्ट, वराहमिहिर, बौधायन व अन्य महानुभावों के कार्य यह सिद्ध करते हैं कि भारतीय अनुसंधान पद्धति पूरी तरह वैज्ञानिक एवं सिद्ध प्रक्रिया है।
विश्वास है कि यह ग्रंथ भारतीय ज्ञान-परंपरा जैसे व्यापक विषय को जनमानस के मध्य विस्तार देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।"