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रामानुजन एक ऐसा नाम है, जिन्होंने अपनी पीढ़ी के गणितज्ञों को प्रेरणा प्रदान की और 21वीं सदी में ऐसे बहुत से गणित-प्रेमी हैं, जो उनके गणित के शोध कार्यों का अभी भी अनुसरण कर रहे हैं। ऐसा कोई भी व्यक्ति, जिसे गणित से प्रेम है, उसके लिए रामानुजन के परिचय की आवश्यकता नहीं है। फ्रीमैन डायसन ने रामानुजन के लिए कहा था, ‘‘उन्होंने बहुत कुछ ढूँढ़ा है और अपने बगीचे में दूसरे लोगों के ढूँढ़ने के लिए और भी बहुत कुछ छोड़ दिया है। हर बार, जब मैं रामानुजन के बगीचे में आता हूँ, तब मैंने वहाँ कुछ नए खिले फूल देखे हैं।’’ इस पुस्तक की रोचकता बरकरार रखने के लिए इसे नौ अलग-अलग वर्गों में बाँट दिया गया है। रामानुजन के व्यक्तित्व एवं कृतित्व तथा गणित को उनके अवदान को प्रश्नोत्तर शैली में प्रस्तुत किया गया। इस रूप में विद्यार्थी-शिक्षार्थियी एवं शोधार्थी गणित को बड़ी सहजता से हृदयंगम कर सकेंगे।.
शिक्षा : एम.एस-सी. (गणित, संक्रिया विज्ञान), एम.ए. (शिक्षा, अंग्रेजी), ई.टी.ई, बी.एड.।प्रकाशन : 100 से अधिक गणितीय लेख, गणित विषय पर 20 से भी अधिक पुस्तकें, दर्जनों कविताएँ।सम्मान : राष्ट्रीय मेधावी छात्रवृति (कक्षा 6 से 10 तक); विज्ञान विधि रेडियो धारावाहिक के लिए दिल्ली द्वारा पुरस्कृत; आशु लेखन कविता के लिए हिंदी अकादमी दिल्ली द्वारा सांत्वना पुरस्कार; नेशनल बेस्ट टीचर का सम्मान ए.आइ.आर.एम.सी. गुजरात द्वारा।अन्य : 150 से अधिक गणित संगोष्ठियों में वैदिक गणित का शिक्षण। 3 बार राष्ट्र्रीय गणित क्विज का संचालन। रेडियो पर गणितीय परिचर्चा का प्रसारण।इ-मेल : rkthakur1974@gmail.com