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राहों के अन्वेषी' पुस्तक में प्रयोगवाद के प्रणेता अज्ञेय एवं उनके समकालीन, प्रतिभाशाली प्रयोगवादी कवि धर्मवीर भारती के काव्य में बिंब के सौंदर्य की विवेचना की गई है। यह विवेचनात्मक समीक्षा काव्य-प्रेमियों और कवियों, जो आज भी अपने काव्य में बिंब का प्रयोग करने का प्रयास करते हैं, के लिए एक सार्थक पाठ्य-सामग्री साबित हो सकती है, क्योंकि इसमें इन दोनों बड़े कवियों के लगभग सभी प्रकार के सुंदर बिंब उदाहरणस्वरूप, व्याख्या सहित दिए गए हैं, जो अच्छा काव्य पढ़ने वाले और सार्थक कविता लिखने वाले, दोनों के लिए लाभकारी और प्रेरणादायक हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त यह सकारात्मक समीक्षा इन दोनों कवियों पर शोध करने वाले, विशेषकर बिंब पर कार्य करने वाले, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए भी अत्यंत लाभदायक साबित हो सकती है, क्योंकि पुस्तक में बिंब के परिचय सहित विशिष्ट बिंबों के सैकड़ों उदाहरण हैं।