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Nal Daman Soordas   

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Features
  • ISBN : 9789375730873
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information

  • 9789375730873
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2026
  • 380
  • Soft Cover
  • 350 Grams

Description

"नल दमन

कहाँ सो नल राजा कहँ रानी। पेम उरझ रह गई कहानी ॥

पेम अमर यह मरै न मारा। बुझे न पेम अगिन चिनगारा ॥

वेई बेद पुरानंह गाई। जिन मन पेम उरझ उरझाई ॥

नाहित ऐसे गये हिरानी। पेम बिना काछू न बखानी ॥

रहत घरी जग कर ब्यवहारा। भरन धुरन फिर मरन अपारा ॥

अगम लेख निगमहं गम नाहीं। धौं दिन कइ आवहं कै जाहीं ॥

पै निदान इतने गम होई। जो आवा सो रहा न कोई ॥

यह मन जान कस्ट में कीन्हा। पेम कथा किरपा चहुँ लीन्हा ॥

मकु हौंहू जो जाहुँ हिराई। कथा उरझ नावं रह जाई ॥

दोहा-

औ पुनि भूल यहो कहों, मोहि का रहा जो नावं।

जौलौं सांची प्रीति सों, सहित न नांव समांव ॥ 8॥

दोहा संख्या-8 का भाव-और फिर यह सब भूलकर कहूँ कि मेरा नाम क्या था, जब तक सच्ची प्रीति है नाम के साथ, उसमें नहीं समाया जाता (क्योंकि स्वयं को खोकर ही उसमें समाया जा सकता है)।

(इसी पुस्तक से सूरदास लखनवी का आत्मकथ्य)

"

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