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"हम खुद को यह विश्वास दिलाते हैं कि अगर हम बस उस एक खोए हुए टुकड़े को खोज लें तो इस पहेली को सुलझाकर 'शांति के साम्राज्य' को हासिल कर सकते हैं। लेकिन यहाँ एक समस्या है-क्या होगा अगर वह जादुई दरवाजा बाहर न हो ? क्या होगा अगर दरवाजा हमारे भीतर मौजूद हो, जो हमारे नजरिए में बदलाव करके खुलने का इंतजार कर रहा हो ?
यह पुस्तक जीवन की चुनौतियों को नजरअंदाज करने के बारे में नहीं है। यह चुनौतियों से सकारात्मक दृष्टि से निपटने के बारे में है। यह एक ऐसा नजरिया देगी, जिसके जरिए हम विपरीत हालातों को फिर से परिभाषित कर सकते हैं, छिपे हुए मौकों की खोज कर सकते हैं, अर्थपूर्ण और खुशहाल जीवन जी सकते हैं। सकारात्मक नजरिया समस्याओं से रहित जीवन का वादा नहीं करता, लेकिन यह हमें उन समस्याओं से जूझने के लिए लचीलापन और दृष्टि देता है।
आइए, ओ'नील के कहे इस कथन पर फिर से विचार करें- 'शांति का खोया हुआ साम्राज्य' बिल्कुल भी खोया नहीं है। यह बस नकारात्मकता, संदेह और भय से छिपा हुआ है। यह खोजने से नहीं मिलेगा; यह मन की एक स्थिति है, जिसे बस बनाना है। और जादुई दरवाजा ? यह भी कोई दूर नहीं है, जो हमको संयोग से मिलेगा। यह एक मानसिकता है, जिससे हम एक पल में जादुई दरवाजा खोल सकते हैं।
याद रखें, चाबी हमेशा आपके अंदर है। जीवन इंतजार कर रहा है। क्या आप दरवाजा खोलेंगे ?"