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"समग्र स्वास्थ्य पर एक अनमोल ग्रंथ। यह पुस्तक इस अवधारणा के इर्द-गिर्द घूमती है कि मन और शरीर एक-दूसरे पर निर्भर हैं, जबकि चिंता सभी बीमारियों का मूल कारण है। एक स्वस्थ मन प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देता है, इसलिए आधुनिक चिकित्सा के माध्यम से सभी बीमारियों का तुरंत 'इलाज' पाना असंभव है, जबकि प्राकृतिक रूप से ठीक होना एक सहज घटना है।
इस कार्य में सांख्यिकी और व्यक्तिगत गैसों का उपयोग इस राय को मजबूत करने के लिए किया गया है कि शल्य चिकित्सा सुधार और औषधि चिकित्सा केवल उपशामक उपाय हैं, जो पुरातन, नियतात्मक नियमों का पालन करते हैं। भारतीय चिकित्सा की एक प्राचीन प्रणाली आयुर्वेद की शानदार भूमिका पर प्रकाश डाला गया है, ताकि वर्तमान संदर्भ में मानव शरीर की सहज बुद्धि को प्रदर्शित किया जा सके।
सुस्पष्ट पाठ, विचारोत्तेजक विषय, आकर्षक छंद और अवलोकन इस पुस्तक को हर किसी के लिए पढ़ने योग्य और ग्राह्य बनाते हैं।"