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Kul Pralay   

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Author Rajiv Mudgal
Features
  • ISBN : 9789375736219
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information

  • Rajiv Mudgal
  • 9789375736219
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2026
  • 208
  • Soft Cover
  • 200 Grams

Description

"कभी मेरी हवाओं में ऋषियों के मंत्र गूंजते थे, और स्वर्ण-दीवारों को देवताओं ने स्पर्श किया था। पर कोई कथा प्रकाश से आरंभ नहीं होती; हर प्रभात से पहले एक प्रलय जन्म लेती है।

मैं द्वारका हूँ जिसे कृष्ण ने बसाया, और नियति ने मिटाया।

राजीव मुद्गल द्वारा रचित 'कुल प्रलय' केवल एक युद्ध की गाथा नहीं है; यह एक साम्राज्य के आत्मविनाश का शोकगीत है। यह कथा उस क्षण की है, जब आकाश से बरसती मायावी आग और भीतर सुलगते अहंकार ने द्वारका की स्वर्ण-दीवारों को घेर लिया।

ऋषियों का श्राप, मदिरा का उन्माद और अपनों के ही रक्त से रँगा प्रभास क्षेत्र, यह यादव कुल के उस अंतिम अध्याय का साक्षी है, जहाँ विजय ही पराजय बन गई।

स्वयं द्वारका नगरी के स्वर में रची गई यह मर्मस्पर्शी काव्यात्मक गाथा, उत्थान से लेकर जल-समाधि तक की एक अविस्मरणीय यात्रा है।"

The Author

Rajiv Mudgal

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