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"यह ग्रंथ कालानुक्रम में इन समस्त परिघटनाओं के समानांतर सनातन मत के वैश्विक चिह्न प्रमाणित करता है। लुप्त सनातन सभ्यता के भग्नावशेषों को चिह्नित करते हुए संपूर्ण विश्व के सांस्कृतिक पुराविचार के ऐक्य को रेखांकित कर यह शोध भविष्य की संकल्पना एवं वैश्विक शांति के मार्ग का प्रस्तुतीकरण भी करता है। सनातन मत ही स्वाभाविक मनुष्यता का आश्रयदाता है। स्वाभाविक एवं मूल सनातन मत के वैश्विक प्रसार से ही प्रत्येक मानव एवं सामूहिक मानवता का उत्कर्ष साध्य है, यह इस शोध का निष्कर्ष है।
ऐसे में सनातन विचार का प्रसार एवं सनातन विचार में प्रत्येक मनुष्य को प्रवृत्त करने का सात्त्वकि दायित्व प्रत्येक सदाचारी मनुष्य का प्राथमिक एवं स्वाभाविक कर्तव्य है, यही इस ग्रंथ के निष्कर्ष अध्याय का सार है। यह कृति 'ग्लोबल सनातन' के रूप में अब मानवता और मनुष्यता के सेवार्थ प्रस्तुत है। महादेव से इस प्रार्थना के साथ कि यह ग्रंथ अपने स्वाभाविक उद्देश्य को पूर्ण कर सके, विश्व शांति एवं मनुष्यता के समग्र कल्याण हेतु यह पुस्तक मानव उत्कर्ष के पथ-प्रदर्शन हेतु समस्त विश्व की सात्त्वकि प्रज्ञा को समर्पित ।"