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"यह पुस्तक भारत के सर्वाधिक दूरदर्शी विज्ञ पुरुषों में से एक भारतरत्न डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर के कुछ सबसे प्रभावी और विचारोत्तेजक भाषणों का पठनीय संकलन है। भारतीय संविधान के मुख्य वास्तुकार और सामाजिक न्याय के प्रबल समर्थक डॉ. आंबेडकर ने अपने शब्दों का इस्तेमाल भेदभाव को चुनौती देने, बदलाव को प्रेरित करने और एक समावेशी तथा समुन्नत समाज की नींव रखने के लिए किया।
इस संग्रह में लोकतंत्र, समानता, जातिगत भेदभाव, शिक्षा और राष्ट्र-निर्माण पर उनके भाषण शामिल हैं। उनके शब्द आज भी गूंजते हैं, जो भारत के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य के प्रति गहरी अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं। इन प्रेरक उद्बोधनों में वंचितों-शोषितों के उत्कर्ष और उन्नयन के प्रति उनकी संवेदनशीलता, राष्ट्र के सम्मुख मुँह बाए खड़ी चुनौतियाँ, भारतवर्ष के नवनिर्माण हेतु उनका व्यावहारिक रोडमैप की स्पष्ट झलक मिलती है।
डॉ. आंबेडकर के भाषण केवल ऐतिहासिक रिकॉर्ड नहीं हैं, बल्कि काररवाई का आह्वान हैं- जो हमें एक न्यायपूर्ण और समदर्शी समाज बनाने का पथ दिखाती हैं। उनकी दृष्टि, उनके संघर्ष और न्याय एवं मानवाधिकारों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को समझने के लिए यह पुस्तक अत्यंत पठनीय है।"