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Deendayal Upadhyaya Ki Prerak Kahaniyan   

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Author Smt. Renu Saini
Features
  • ISBN : 9789384344917
  • Language : 400.00
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
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  • Smt. Renu Saini
  • 9789384344917
  • 400.00
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2018
  • 200
  • Hard Cover

Description

समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उन्नयन को ही राष्ट्र-निर्माण का मुख्य ध्येय माननेवाले पंडित दीनदयाल उपाध्याय सादगी एवं प्रभावी व्यक्तित्व की प्रतिमूर्ति थे, लेकिन अपने दिव्य गुणों से वे दिव्य और अद्भुत बन गए। प्रत्येक व्यक्ति उनका सान्निध्य पाकर स्वयं को धन्य समझता था। वे किसी भी व्यक्ति को निराश नहीं लौटाते थे। अपने प्रखर और तीव्र मस्तिष्क का प्रयोग कर हर व्यक्ति की समस्या का हल ढूँढ़ने का प्रयास करते थे। हर व्यक्ति उनका ऋणी था। ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा, साहस और नेतृत्व के गुण उनमें कूट-कूटकर भरे थे। वे अपने इन गुणों के माध्यम से ही हर व्यक्ति के हृदय में अपना एक विशेष स्थान बना पाए।
राष्ट्र की एकता-अखंडता उनके लिए सर्वोपरि रही और इसी के लिए वे अनवरत कर्मशील रहे। अपने छोटे, परंतु यशस्वी जीवन में उन्होंने सामूहिकता, संगठन-कौशल और राष्ट्रभाव के जो अप्रतिम उदाहरण प्रस्तुत किए, वे न केवल वर्तमान वरन् भविष्य की पीढि़यों का भी मार्ग प्रशस्त करेंगे।
माँ भारती के अमर सपूत पं. दीनदयाल उपाध्याय के प्रेरणाप्रद जीवन की ये छोटी-छोटी कहानियाँ जीवन में कुछ बड़ा करने का मार्ग प्रशस्त करेंगी, ऐसा हमारा अटल विश्वास है।

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अनुक्रम कॉलेज की परिषद् में उपस्थिति —Pgs. 105
प्राक्कथन —Pgs. 7 संस्कृति के राजदूत —Pgs. 107
दीना का जन्म —Pgs. 11 महिला का सम्मान —Pgs. 109
दीना का ननिहाल —Pgs. 13 चुनाव में पराजय —Pgs. 111
माता-पिता की अकाल मृत्यु —Pgs. 14 प्रमाण-पत्रों का त्याग —Pgs. 113
निर्भीक दीना —Pgs. 16 विदेश में जनसंघ का अस्तित्व —Pgs. 115
बचपन की शरारत —Pgs. 18 कला की कमाई —Pgs. 117
बड़ों के प्रति सेवाभाव —Pgs. 20 द्वितीय श्रेणी की यात्रा —Pgs. 119
प्रतिभा के धनी —Pgs. 22 दीनदयालजी की सहिष्णुता —Pgs. 121
दीना की पगड़ी —Pgs. 24 राष्ट्र सर्वोपरि है —Pgs. 123
भाई की अकाल मृत्यु —Pgs. 25 प्रत्याशी पंडितजी —Pgs. 124
प्रखर मस्तिष्क के दीना —Pgs. 27 जनसंघ जीत गया —Pgs. 126
दीनदयाल का पुरस्कार —Pgs. 29 संघ का दामाद —Pgs. 128
मित्र की पुस्तक —Pgs. 31 कर्मरत हो कार्यकर्ता —Pgs. 130
ईमानदारी की नींव —Pgs. 32 नगरपालिका की जीप —Pgs. 132
इंटरमीडिएट की पढ़ाई —Pgs. 34 राजनीति दर्शन —Pgs. 134
जीरो एसोसिएशन का निर्माण —Pgs. 36 कार्यकर्ताओं की चिंता —Pgs. 136
इंटरमीडिएट में भी अव्वल —Pgs. 38 स्वयंसेवक की सेवा —Pgs. 138
ममेरी बहन की बीमारी —Pgs. 40 संघ जहाँ, शांति वहाँ —Pgs. 140
प्रतियोगिता का साक्षात्कार —Pgs. 42 सबको है मत का अधिकार —Pgs. 142
संघ कार्य को समर्पित —Pgs. 44 संघ और जनसंघ —Pgs. 144
ममेरी बहन का विवाह —Pgs. 46 देशहित सर्वोपरि —Pgs. 146
कोई काम छोटा नहीं —Pgs. 48 केंद्रबिंदु हरिसिंह —Pgs. 148
सादगी भरा रूप —Pgs. 50 पंजाबी बोली से भाषा —Pgs. 150
घुम्मा सैलून —Pgs. 52 छपाई मशीन —Pgs. 152
स्वच्छ विचार —Pgs. 54 मैं अब भी प्रचारक हूँ —Pgs. 154
खिचड़ी का स्वाद —Pgs. 56 पाञ्चजन्य के संपादक —Pgs. 156
कृषक का पक्ष —Pgs. 58 प्रदेश कार्यालय का उद्घाटन —Pgs. 158
मजाकिया स्वभाव —Pgs. 60 स्वदेशी अणुबम —Pgs. 160
ममतामय व्यवहार —Pgs. 62 अद्भुत भाई —Pgs. 162
ड्राइवर की मदद —Pgs. 64 विभाजन का विरोध —Pgs. 164
ठंड का मौसम —Pgs. 66 नींव का पत्थर —Pgs. 166
भ्रष्टाचार का माप —Pgs. 68 जनसंघ के अध्यक्ष —Pgs. 168
उल्टा टिकट —Pgs. 70 धर्म-परिवर्तन का संकट —Pgs. 170
निरंतर अभ्यास करो —Pgs. 72 भारतीय भाषाओं की सुंदरता —Pgs. 172
देशी भाषा —Pgs. 74 अंग्रेजी व्याकरण क्यों? —Pgs. 174
नियम का सम्मान —Pgs. 76 प्याज का छौंक —Pgs. 176
सादगी भरा स्वभाव —Pgs. 78 राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता —Pgs. 178
हाजिरजवाब दीनदयाल —Pgs. 80 शिक्षा का महत्त्व —Pgs. 180
भाग्यवाद नहीं, कर्मवाद —Pgs. 82 देश को समर्पित —Pgs. 182
सत्याग्रहियों की पीड़ा —Pgs. 84 मेरा बड़ा परिवार है —Pgs. 184
सावरकर से मुलाकात —Pgs. 86 कविता से ज्यादा सर्वश्रेष्ठ कर्म जरूरी —Pgs. 185
स्वदेशी वस्तुओं का इस्तेमाल —Pgs. 88 वर्षा का शुभ संकेत —Pgs. 187
वेशभूषा से अंदाज —Pgs. 89 यह कैसी आस्था? —Pgs. 189
जूते साफ करने का कपड़ा —Pgs. 91 रसोइया मंगल —Pgs. 191
चैक की राशि —Pgs. 93 पुस्तक से दोस्ती —Pgs. 192
कुरते का बटन —Pgs. 95 पंडाल की कनात —Pgs. 193
सोरेनसन की चुटकी —Pgs. 97 नई शाखा का आरंभ —Pgs. 194
बलराज मधोक की उपस्थिति —Pgs. 99 अनुवाद का कार्य —Pgs. 196
लेखन का गुण —Pgs. 101 दर्दनाक अंत —Pgs. 197
पुस्तकों की रचना —Pgs. 103 एक जीवन दर्शन —Pgs. 199

 

The Author

Smt. Renu Saini

रेनू सैनी
जन्म : 1 अप्रैल।
शिक्षा : एम.फिल. (हिंदी)।
प्रकाशन : ‘दिशा देती कथाएँ’, ‘बचपन का सफर’ एवं ‘बचपन मुसकाया जब इन्हें सुनाया’।
सम्मान : दिल्ली की हिंदी अकादमी द्वारा चार बार नवोदित लेखन एवं आठ बार आशुलेखन में पुरस्कृत; ‘बचपन का सफर’ पुस्तक को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा बाल साहित्य वर्ग के अंतर्गत ‘भारतेंदु हरिश्चंद्र पुरस्कार (द्वितीय पुरस्कार); पाँचवीं कक्षा की पाठ्यपुस्तक ‘वितान’ के अंतर्गत कहानी ‘अद्भुत प्रतिभा’ शामिल; पाठ्यपुस्तक ‘बातों की फुलवारी’ के अंतर्गत ‘आखरदीप’ कहानी समिलित। राष्ट्रीय स्तर की अनेक पत्रपत्रिकाओं एवं आकाशवाणी से रचनाओं का प्रकाशन व प्रसारण।
संप्रति : सरकारी सेवा में कार्यरत।

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