Prabhat Prakashan, one of the leading publishing houses in India eBooks | Careers | Events | Publish With Us | Dealers | Download Catalogues
Helpline: +91-7827007777

Chhatrapati Shivaji Maharaj : Bharatiya Nausena ke Janak   

₹350

Out of Stock
  We provide FREE Delivery on orders over ₹1500.00
Delivery Usually delivered in 5-6 days.
Author Dr. Hemantraje Gaikwad
Features
  • ISBN : 9789375734390
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information

  • Dr. Hemantraje Gaikwad
  • 9789375734390
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2026
  • 176
  • Soft Cover
  • 200 Grams

Description

"यह पुस्तक शिवाजी महाराज की नौसेना के दूर की सोच वाले विकास पर फोकस करके उनकी शानदार लीडरशिप को दिखाती है। अंदरूनी इलाकों की रक्षा करने और आर्थिक खुशहाली पक्की करने की चुनौती का सामना करते हुए शिवाजी महाराज ने कोंकण तट पर स्ट्रेटेजी के साथ जहाज और नेवल बेस बनाए, जिससे कोस्टल डिफेंस के विषय में उनकी दूरगामी सोच का पता चलता है।

मराठा नेवी की खासियतों, जिसमें भारी गन-बोट और कोस्टल युद्ध की टैक्टिक्स शामिल हैं, के बारे में बताया गया है। यह पुस्तक 1679 में खंडेरी आइलैंड की किलेबंदी के बारे में बताती है, जो एक अहम पल था, जब शिवाजी महाराज की लीडरशिप में मराठों ने अंग्रेजी और सिद्दी सेनाओं की घेराबंदी के खिलाफ बेमिसाल हिम्मत दिखाई थी।

लेखक मराठों के आखिर तक लड़ने के पक्के इरादे पर जोर देते हैं, यहाँ तक कि हार तय होने पर भी, जो अनुभवी अंग्रेजी नौसेना ताकत के खिलाफ उनकी हिम्मत और इच्छाशक्ति को दिखाता है। यह पुस्तक यह मानते हुए समाप्त होती है कि यह अलग-अलग स्रोतों से इकट्ठा किए गए फैक्ट्स का कलेक्शन है।"

The Author

Dr. Hemantraje Gaikwad

डॉ. हेमंतराजे गायकवाड ने अपनी एमबीबीएस डीओएमएस की पढ़ाई ग्रांट मेडिकल कॉलेज से की, जहाँ वे छात्र संघ के महासचिव थे। सन्‌ 1999 में अपने बैच की रजत जयंती को मनाने के लिए उन्होंने अपने कॉलेज के दिनों से जुड़ी इस रोचक पुस्तक को लिखा जिसका नाम है--“चकारका मकारका।'


सन्‌ 1986 में वे चिकित्सा अधिकारी के रूप में नियुक्त हुए और कालांतर में ग्रेटर मुंबई के कमांडेंट बने । वे "स्वतंत्रता स्वर्ण जयंती पदक ' (1997) व ' महाराष्ट्र राज्य होमगार्ड हीरक जयंती पदक' (2006) से अलंकृत हैं। उन्होंने कॉलेज/यूनिवर्सिटी की प्रतियोगिताओं में वाद-विवाद, रॉक क्लाइंबिंग और बैडमिंटन के अनेक पुरस्कार जीते। सन्‌ 1980 में अपने इंटर्नशिप के दौरान उन्होंने चिरनर ग्रामीण चिकित्सा केंद्र की स्थापना की, जो आज बढ़ता हुआ चालीस बिस्तरोंबवाला ग्रामीण अस्पताल बन गया है। पिछले सोलह वर्षों में 7000 से अधिक चिकित्सा सहायकों को प्रशिक्षित किया । डॉ. गायकवाड भारत सेवक समाज के क्षेत्रीय अधिकारी (महाराष्ट्र) थे, जिसके संस्थापक अध्यक्ष पं. जवाहरलाल नेहरू थे। भासेस को पहले 'सर्वेट सोसाइटी ऑफ इंडिया' कहते थे, जिसकी स्थापना श्री गोपाल कृष्ण गोखले ने सन्‌ 1902 में की थी।


लायंस क्लब इंटरनेशनल ने उन्हें असाधारण शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया था | उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न अवार्ड और राजीव गांधी शिरोमणि पुरस्कार भी मिल चुका है। उनकी पुस्तक 'महान शिवाजी महाराज' (मराठी) सर्वाधिक बिकनेवाली पुस्तकों में शामिल है। वह डॉ. पुष्पा गायकवाड़ के साथ सुखद वैवाहिक जीवन बिता रहे हैं, जो एक नेत्र रोग सर्जन हैं । उनके दो बच्चे--डॉ. गौरांग, जो होम्योपैथ हैं और डॉ. गुंजन, जो डेंटल सर्जन हैं।

Customers who bought this also bought

WRITE YOUR OWN REVIEW