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"भारतीय साहित्य में लोक की अवधारणा सीमित अर्थ नहीं प्रदान करती है। यह विषयवस्तु के साथ-साथ अभिव्यक्ति की शैली, भाषा और संरचना के स्तर पर भी सघनता और जीवंतता प्रदान करती है। लोक और संस्कृति एक-दूसरे से गहराई से संबद्ध हैं। लोक आम लोगों की जीवनशैली, आस्था, विश्वास, कला आदि को दरशाता है, जबकि संस्कृति सामाजिक मूल्यों, कला के मानकों और ज्ञान आदि को समाहित करती है। लोक साहित्य लोक का ही एक अंग है। एक पंक्ति या सरलीकृत रूप में 'किसी भी समूह की साझा परंपरा के तरीके को लोक संस्कृति कहते हैं।' यह अपनी विशिष्ट पहचान रखती है और एक या अधिक साझा परंपराओं के माध्यम से स्वयं को व्यक्त करती है।
लोक संस्कृति (Folk Culture) एक व्यापक शब्द है, जो किसी विशेष समुदाय या क्षेत्र के लोगों के बीच पारंपरिक, पारस्परिक, मौखिक और अनौपचारिक रूप से प्रसारित होने वाली सांस्कृतिक प्रथाओं, विश्वासों, कलात्मक अभिव्यक्तियों और जीवनशैली को दरशाती है। संस्कृति आमतौर पर एक विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र, इतिहास और सामाजिक मूल्यों से जुड़ी होती है तथा मौखिक परंपराओं और अनौपचारिक शिक्षा के माध्यम से पीढ़ियों तक पहुँचाई जाती है।"