₹300
"महाजनपदों के उदय और नगरीकरण के साथ-साथ छठी शताब्दी ईसा पूर्व का भारत आर्थिक दृष्टि से परिवर्तनशील था। व्यापार और शिल्पकारिता का विकास हो रहा था। सिक्कों का प्रचलन आरंभ हो चुका था। नगरों में वैश्य वर्ग समृद्ध हो रहा था, परंतु धर्म में उसकी स्थिति सीमित थी। इस आर्थिक समृद्धि ने व्यापारियों और नगरवासियों को नए धर्मों का संरक्षक बना दिया। यही कारण है कि जैन धर्म का सबसे बड़ा आधार व्यापारी वर्ग बना और बौद्ध संघों को भी व्यापारियों से उदार सहयोग मिला।
छठी शताब्दी ईसा पूर्व के आसपास भारत सोलह महाजनपदों में विभाजित था। इनमें मगध, कोसल, वत्स और अवंति शक्तिशाली राज्य थे। इन्हीं महाजनपदों में बौद्ध और जैन धर्म का उदय एवं विस्तार हुआ। बाद में मगध साम्राज्य ने बौद्ध धर्म को विशेष संरक्षण दिया। इस समय केवल बौद्ध और जैन ही नहीं, बल्कि अनेक अन्य श्रमण संप्रदाय भी सक्रिय थे। आजीवक, चार्वाक, सांख्य जैसे मत विद्यमान थे।"