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Bharatiya Bhakti Andolan   

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Release Date 24-12-2025
Author Prof. Surya Prasad Dixit
Features
  • ISBN : 9789355621306
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : 1st
  • ...more

More Information

  • Prof. Surya Prasad Dixit
  • 9789355621306
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • 1st
  • 2025
  • 160
  • Soft Cover
  • 200 Grams

Description

"विश्व गुरु' भारत की ज्ञान निधि से आक्रांत और 'सोने की चिड़िया' नाम से विख्यात इस देश की भौतिक समृद्धि से प्रलुब्ध विदेशी-विधर्मी लुटेरों के आक्रमणों का सिलसिला 3,350 वर्ष पूर्व शुरू हुआ था। यह संघर्ष अठारहवीं शती तक चलता रहा। मुगल शासनकाल के कई कबीलाई हमले तो जिहाद या क्रूसेड का नारा लगाते हुए गजवा-ए-हिंद में परिणत हो गए।

इन दस्युओं का एकमात्र ध्येयधर्म था इसलामीकरण, यानी धर्मांतरण। इसके लिए उन्होंने बहुशः कत्लेआम किए, निर्ममतापूर्वक उपासना स्थल तोड़े, भरसक धर्मग्रंथों को नष्ट किया, बलात् जजिया कर लगाया और हमारा सांस्कृतिक विरूपण किया। उस हताशाजन्य विषम परिस्थिति में भारतीय भाषाओं के कई बलिपंथी भक्तकवि अस्तित्वरक्षा का संकल्प लेकर परस्पर व्यूहबद्ध हुए और साहित्य सृजन को सत्याग्रह का रूप दिया।

इन जनकवियों ने देश की जनभाषाओं में अपनी जनसंस्कृति के सहारे जनजागरण का शंखनाद किया। इन भक्तों का शीतयुद्ध तथा गुरिल्ला युद्ध सदियों तक चला। इस बीच लाखों वीरगति को प्राप्त हुए। भाँति-भाँति की अमानुषिक यातनाएँ झेलीं, किंतु वे धर्मपथ पर आरूढ़ रहे।

उन्होंने ऐश्वर्य भोग, उत्सवधर्मिता, नृत्य-संगीत, रासलीला, रामलीला, सेवाभावना, लोकसंस्कृति आदि द्वारा लोगों को सम्मोहित कर लिया, जिससे ये जनसंकुल तीर्थ शक्ति के केंद्र बन गए, वही छावनियाँ बन गयी। फलतः मजहबी जुल्मोसितम तथा बुतशिकनी जुनून थम गया। इन्होंने युक्तिपूर्वक कलंदरों और बादशाहों के छद्म को तोड़ा और सबका समन्वय कर उन्हें श्रुति-सम्मत हरिभक्ति से जोड़ा। मध्यकालीन इतिहास के परिप्रेक्ष्य में भक्तिकाव्य की शक्ति का निर्वचन ही इस कृति का प्रमुख प्रतिपाद्य है।"

The Author

Prof. Surya Prasad Dixit

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