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"बालश्रम केवल भारतवर्ष की ही नहीं अपितु एक वैश्विक सामाजिक बुराई है। भारत इससे जूझ रहा है और इसके समाधान हेतु सरकारी व गैर-सरकारी प्रयास निरंतर किए जा रहे हैं। बालश्रम के संबंध में भारतीय संविधान में मौजूद अनुच्छेद 24 के अनुसार 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को फैक्टरी, खदान या खतरनाक उद्योगों में किसी भी कार्य हेतु नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए। इसी तरह संविधान के अनुच्छेद 39 (ई) तथा (एफ) में स्पष्ट कहा गया है कि पुरुष, स्त्री अथवा छोटे बच्चों के द्वारा किए जा रहे कार्यों में उनके स्वास्थ्य तथा शरीर का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।
केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार का शोधग्रंथ 'बालश्रम उन्मूलन' स्वतंत्र पुस्तक के रूप में मध्य प्रदेश के सागर क्षेत्र में मौजूद होटल व्यवसाय से जुड़े बालश्रमिकों के जटिल जीवन की गाथा को उकेरने के साथ ही देश के अंदर बालश्रमिकों के लिए नीति-निर्माण का मानक सिद्ध हो सकता है।
इस पुस्तक में बालश्रमिकों के स्वास्थ्य, उनके ऊपर कार्य के दबाव, साफ-सफाई तथा स्वच्छता की कमी आदि व्यापक विषयों पर शोध सर्वे के निष्कर्ष अत्यंत उपयोगी हैं, जो देश में बालश्रम उन्मूलन के लिए एक दिशा-दर्शन का कार्य करेंगे।"
वीरेंद्र कुमार का जन्म सन् 1948 ई. में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जनपद के रुस्तमपुर गौतना नामक ग्राम में हुआ। इनकी प्रारंभिक शिक्षा गाँव में ही हुई। सन् 1958 ई. में ये अपने परिवार के साथ अलीगढ़ चले आए। इन्होंने सन् 1970 में आगरा विश्वविद्यालय से गणित विषय में एम.एस-सी. की डिग्री प्रथम श्रेणी के साथ प्राप्त की; सन् 1972 में आगरा विश्वविद्यालय से बी.एड. की डिग्री प्राप्त की। इन्होंने स्पेशल फंक्शंस के अंतर्गत कई शोध-पत्र प्रकाशित किए। सन् 1972 से लगातार 37 वर्ष इन्होंने मथुरा/हाथरस जनपद में इंटरमीडिएट के छात्रों को गणित विषय पढ़ाया। कुछ समय तक वे बुलंदशहर जनपद में प्रधानाचार्य पद पर भी रहे।
सन् 2009 में शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्ति प्राप्त कर स्वाध्याय तथा लेखन कार्य में अपना समय व्यतीत करते हैं। गणित के क्षेत्र में इन्होंने वैदिक अंकगणित, वैदिक बीजगणित, गणित की रोचक बातें, सामान्य गणित पेचीदे प्रश्न, गणित शिक्षण में उपयोगी पटचित्र, कंसेप्ट चार्ट्स इन मैथेमैटिक्स तथा आधुनिक भारत के दिवंगत गणितज्ञ नामक पुस्तकें लिखी हैं जो प्रकाशित होकर खूब लोकप्रिय हुई हैं। गणित के अतिरिक्त इन्होंने 'मीठा बोलें सुखी रहें' नामक व्यक्तित्व विकास की पुस्तक लिखी है। अनेक पुस्तकें प्रकाशित होने की प्रतीक्षा में हैं।