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"स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारतीय राजनीतिक इतिहास में यदि कोई एक नेता हैं, जिन्होंने सामाजिक न्याय, आर्थिक विषमता, राजनीतिक भेदभाव और असमानता के क्षेत्र में अपनी पूरी निष्ठा, समर्पण और सेवाभाव से कार्य किया, तो वे पूज्य बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर हैं।
हम राष्ट्रप्रेमी भारतवासी उन्हें सामाजिक क्रांति के जनक के रूप में देखते हैं, किंतु वे एक बहुआयामी व्यक्तित्व थे- दूरदर्शी, अर्थशास्त्री, न्यायविद्- इन सभी का अद्वितीय संगम।
बाबासाहेब की योग्यता और प्रतिभा से ईर्ष्यावश तत्कालीन सत्तारूढ़ राजनीतिक दल कांग्रेस के वंशवादी नेताओं ने उन्हें अपमानित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आज उसी राजनीतिक दल के उत्तराधिकारी, बाबासाहेब द्वारा रचित संविधान का निरंतर अपमान और अवहेलना करने में लगे हुए हैं।
हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी 'भारत के संविधान' को मात्र एक पुस्तक नहीं, बल्कि एक पवित्र ग्रंथ मानते हैं। वे भारतरत्न बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर को अपना प्रेरणास्रोत मान कर राष्ट्रसेवा का कार्य कर रहे हैं और उन्हीं के द्वारा रचित संविधान के अनुरूप देश की प्रगति को सामाजिक न्याय, गरीब कल्याण, महिला सम्मान और सर्वांगीण, सर्वसमावेशी विकास के माध्यम से साकार कर विकसित भारत का निर्माण कर रहे हैं।"