"वनवासी युवक-युवतियाँ प्रतिभा के धनी होते हैं। जिनका जीवन असीम शक्ति और आत्मविश्वास से लबालब भरा होता है। यह अनुभूति भी प्रेरणा जगाती है। समाज जीवन में अनेक ऐसे प्रेरणादायी महिला-पुरुष हैं, जिनके जीवन में निस्स्वार्थ प्रेम, असीम ईश्वरनिष्ठा, जागरूकता, त्याग-समर्पण आदि है, जिनके दर्शनमात्र से ही आगे बढ़ने की भावना बलवती हो जाती है। यह अनुभव भी श्री अतुल जोग को प्राप्त हुआ। देश में अनेक विभिन्न संप्रदायों के गुरु, संत-महात्माओं का दर्शन और समाज जागरण का पदचिह्न भी जगह-जगह स्थापित है, यह भी अनुभव में आया। प्रवास के दौरान महिलाओं द्वारा प्रदर्शित शक्तियों का भी दर्शन हुआ है कि नारियाँ सबला होती हैं।
जनजाति जीवन-दर्शन में विभिन्न प्रकार की भाषाएँ, रीति-रिवाज, परंपराएँ हैं, लेकिन सभी की मूल संस्कृति एक ही है। सभी इस धरती को माँ कहकर पुकारते हैं और विभिन्न अवसरों पर पूजा भी करते हैं। जनजाति जीवन-दर्शन की बुनियाद में सामूहिक जीवन-पद्धति, सामाजिक उत्तरदायित्व, स्त्री-पुरुष सहभाग, श्रम-मूलक प्रतिष्ठा का जीवन, पारंपरिक जनतंत्र, सामुदायिक गणतंत्र व्यवस्था है, जो संपूर्ण जीवन की गारंटी देती है।
जनजातीय जीवन में कार्य करते हुए कर्मयोद्धा अतुल जोगजी के समर्पण, त्याग और सहभाग का प्रेरक संकलन है ' अनुभूति'।"