Prabhat Prakashan, one of the leading publishing houses in India eBooks | Careers | Events | Publish With Us | Dealers | Download Catalogues
Helpline: +91-7827007777

AGEYA RACHNA SAGAR

₹700

Out of Stock
  We provide FREE Delivery on orders over ₹1500.00
Delivery Usually delivered in 5-6 days.
Author SH Vatsyayan Ajneya
Features
  • ISBN : 9789350480434
  • Language : Hindi
  • Publisher : Prabhat Prakashan
  • Edition : Ist
  • ...more

More Information

  • SH Vatsyayan Ajneya
  • 9789350480434
  • Hindi
  • Prabhat Prakashan
  • Ist
  • 2016
  • 584
  • Hard Cover
  • 855 Grams

Description

अज्ञेय रचना सागरसच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ के सृजन और चिंतन से संपन्न यह संचयन उनके सृजन के प्रति नई उत्सुकता और जिज्ञासा जगाने का प्रयत्‍न है। साहित्य की शायद ही कोई विधा हो, जिसमें कविवर रवींद्रनाथ टैगोर की तरह अज्ञेय ने नए रचना-प्रयोगों से नए प्रतिमान स्थापित न किए हों। हिंदी में उनसे पहले और उनके बाद ऐसा कोई साहित्यकार नहीं है, जिसने इतनी सारी विधाओं में इस ढंग की अगुआई की हो। भारतीय साहित्य में अज्ञेयजी अपने समय के साहित्य-नायक रहे हैं और विद्रोही स्वभाव के स्वामी होने के कारण भाषा, साहित्य, पत्रकारिता एवं संस्कृति के संबंध में पारंपरिक अवधारणाओं को ध्वंस करते हुए उन्होंने नए चिंतन की नींव रखी। हिंदी साहित्य में किसी विचारक ने साहित्य संबंधी इतनी बहसें नहीं उठाईं जितनी अज्ञेय ने।
हमारी गुलाम मानसिकता को अज्ञेय का स्वाधीन चिंतन चुनौती देता रहा है। इसलिए उन पर न जाने कितने प्रहार हुए। लेकिन अज्ञेय अविचल भाव से प्रहारों-आक्षेपों, निराधार आरोपों को झेलते हुए नई राहों का अन्वेषण करते रहे। आज अज्ञेय को पढ़ने का अर्थ है—साहित्य की नई सोच से साक्षात्कार करना, उनके अस्तित्व से हिंदी में नए ढंग से प्रथम बार बाल-बोध पर चिंतन तथा आलोचना के क्षेत्र में सर्जनात्मक आलोचना का नवोन्मेष हुआ और साहित्यालोचन का बासीपन समाप्‍त हुआ। अज्ञेयजी ने ‘स्वाधीनता’ को चरम मूल्य स्वीकार किया है। उनका समस्त लेखन स्वातंत्र्य की तलाश के विभिन्न रूपों का दस्तावेज है। अज्ञेय के विशाल रचना-सागर के कुछ विशिष्‍ट मोती और सीप इस संचयन में संकलित हैं।

______________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________________

अनुक्रम  
भूमिका मुझे आज हँसना चाहिए  — Pgs. १२८
अज्ञेय : सन्नाटे का छंद  — Pgs. १३ देखता—अगर देखता  — Pgs. १२९
काव्य चक्रांत शिला-२७  — Pgs. १३१
आज तुम शद न दो  — Pgs. ५३ वसीयत  — Pgs. १३१
शद और सत्य  — Pgs. ५४ मरुथल में देवता  — Pgs. १३२
यह दीप अकेला  — Pgs. ५४ बना दे, चितेरे  — Pgs. १३२
पगली आलोक-किरण  — Pgs. ५५ असाध्य वीणा  — Pgs. १३४
दीप पत्थर का  — Pgs. ५६ नंदा देवी  — Pgs. १४५
नया कवि : आत्म-स्वीकार  — Pgs. ५६ सोन-मछली  — Pgs. १४७
तुम कदाचित् न भी जानो  — Pgs. ५७ सम्राज्ञी का नैवेद्य-दान*  — Pgs. १४७
मुझे तीन दो शद  — Pgs. ५८ नाच  — Pgs. १४८
हवाई यात्रा : ऊँची उड़ान  — Pgs. ५८ चीनी चाय पीते हुए  — Pgs. १५०
सूर्यास्त  — Pgs. ५९ गूँगे  — Pgs. १५१
पश्चिम के समूह-जन  — Pgs. ५९ छंद  — Pgs. १५१
योंकि तुम हो  — Pgs. ६० डायरी (अंत: प्रक्रियाएँ)
विपर्यय  — Pgs. ६१ पूर्व-पीठिका  — Pgs. १५५
भीतर जागा दाता  — Pgs. ६१ कहानियाँ
चक्रांत शिला-१  — Pgs. ६३ गैंग्रीन या रोज  — Pgs. १६१
चक्रांत शिला-१०  — Pgs. ६४ हीली-बोन् की बाखें  — Pgs. १७१
चक्रांत शिला-२४  — Pgs. ६५ मेजर चौधरी की वापसी  — Pgs. १७९
चक्रांत शिला-१६  — Pgs. ६६ विवेक से बढ़कर   — Pgs. १८८
पहेली  — Pgs. ६७ जिजीविषा  — Pgs. २०३
रूप-केकी  — Pgs. ६८ रमंते तत्र देवता:  — Pgs. २१३
एक दिन चुक जाएगी ही बात  — Pgs. ६८ उपन्यास
कलगी बाजरे की  — Pgs. ६९ शेखर : एक जीवनी (अंश)—पुरुष और परिस्थिति  — Pgs. २२३
नदी के द्वीप  — Pgs. ७० साहित्यिक संस्मरण
वहाँ रात  — Pgs. ७२ राष्ट्रकवि  — Pgs. २६५
उड़ चल, हारिल  — Pgs. ७३ उपन्यास सम्राट्  — Pgs. २७७
मैं वह धनु हूँ  — Pgs. ७४ एक भारतीय आत्मा : एक चुनौती  — Pgs. २९४
कितनी शांति! कितनी शांति!  — Pgs. ७५ निबन्ध
पानी बरसा  — Pgs. ७७ कविता : श्रव्य से पठ्य तक  — Pgs. ३०५
हवाएँ चैत की  — Pgs. ७७ परिदृष्टि : प्रतिदृष्टि  — Pgs. ३१९
लौटे यात्री का वतव्य  — Pgs. ७८ अर्थ-प्रतिपत्ति और अर्थ-संप्रेषण  — Pgs. ३२३
सागर पर भोर  — Pgs. ८० नई कविता : प्रयोग के आयाम  — Pgs. ३३२
हवाई अड्डे पर विदा  — Pgs. ८० काव्य का सत्य और कवि का वतव्य  — Pgs. ३३९
मैंने देखा, एक बूँद  — Pgs. ८० काल का डमरु-नाद  — Pgs. ३४८
जन्म-दिवस  — Pgs. ८१ लेखक और परिवेश  — Pgs. ३५८
चिड़िया की कहानी  — Pgs. ८१ ललित-निबंध
धूप  — Pgs. ८१ पुच्छल तारे के साथ-साथ  — Pgs. ३७३
न दो प्यार  — Pgs. ८२ बड़ी बुआ  — Pgs. ३७८
बाँगर और खादर  — Pgs. ८२ पहला नाटक  — Pgs. ३८४
हिरोशिमा  — Pgs. ८४ छाया का जंगल  — Pgs. ३८८
सरस्वती-पुत्र  — Pgs. ८५ बरामदे में  — Pgs. ३९५
मैं वहाँ हूँ  — Pgs. ८६ मन बेईमान हो गया  — Pgs. ३९९
टेसू  — Pgs. ८९ बरसात  — Pgs. ४०३
साँप  — Pgs. ९० एक अंतराल  — Pgs. ४०८
योगफल  — Pgs. ९० कौन गली गए स्याम  — Pgs. ४१२
सर्जना के क्षण  — Pgs. ९० यात्रा-वृ 
अंत:सलिला  — Pgs. ९१ एक बूँद सहसा उछली (विदेश यात्रा)  — Pgs. ४२५
बड़े शहर का एक साक्षात्कार  — Pgs. ९२ यूरोप की अमरावती : रोमा  — Pgs. ४२५
मुझे आज हँसना चाहिए  — Pgs. ९४ विद्रोह की परंपरा में  — Pgs. ४३६
जो पुल बनाएँगे  — Pgs. ९६ यूरोप की पुष्पावती : फिरेंजे  — Pgs. ४४१
जरा व्याध  — Pgs. ९६ खुदा के मसखरे के घर : असीसी  — Pgs. ४५०
हँसती रहने देना  — Pgs. ९७ यूरोप की छत पर : स्विट्जरलैंड  — Pgs. ४५६
नदी की बाँक पर छाया  — Pgs. ९८ एक यूरोपीय चिंतक से भेंट  — Pgs. ४६१
कदंब-कालिंदी  — Pgs. ९९ तो यह पेरिस है!  — Pgs. ४७२
अलाव  — Pgs. १०० नाटक
के सारस अकेले  — Pgs. १०० उत्तर प्रियदर्शी (गीति-नाट्य)  — Pgs. ४८३
कौन खोले द्वार  — Pgs. १०१ अनुवाद
कि हम नहीं रहेंगे  — Pgs. १०१ सात कविताएँ : हाइनरिश हाइने  — Pgs. ४८७
पेरियार१  — Pgs. १०२ अज्ञेय के नाम पत्र
पानी बरसा  — Pgs. १०३ राय कृष्णदास  — Pgs. ४९५
जन्म-दिवस  — Pgs. १०४ बनारसीदास चतुर्वेदी  — Pgs. ४९६
किरण मर जाएगी  — Pgs. १०५ तोशिओ तानाका  — Pgs. ४९७
पराजय है याद  — Pgs. १०६ आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी  — Pgs. ४९९
पावस-प्रात, शिलङ्  — Pgs. १०६ शमशेर बहादुर सिंह  — Pgs. ४९९
दूर्वाचल  — Pgs. १०७ ग.मा. मुतिबोध  — Pgs. ५००
शरणार्थी-6 : समानांतर साँप  — Pgs. १०७ विजयदेव नारायण साही  — Pgs. ५०१
कतकी पूनो  — Pgs. १०८ भवानी प्रसाद मिश्र  — Pgs. ५०३
‘अकेली न जैयो राधे जमुना के तीर’  — Pgs. १०८ फणीश्वरनाथ रेणु  — Pgs. ५०३
पहेली  — Pgs. ११० अज्ञेय के दो पत्र
औद्योगिक बस्ती  — Pgs. ११० धर्मवीर भारती के नाम  — Pgs. ५०९
सांध्य तारा  — Pgs. १११ राजेंद्र मिश्र के नाम  — Pgs. ५१०
सागर पर भोर  — Pgs. १११ साक्षात्कार
मानव अकेला  — Pgs. ११२ साक्षात्कार-१
मैंने देखा, एक बूँद  — Pgs. ११२ अज्ञेय द्वारा अमृतलाल नागर से  — Pgs. ५१५
वसंत  — Pgs. ११३ साक्षात्कार-२
अंधकार में दीप  — Pgs. ११३ अज्ञेय : क्रांतिकारियों के साथ बीता बचपन  — Pgs. ५५२
टेर रहा सागर  — Pgs. ११४ साक्षात्कार-३
एक दिन चुक जाएगी ही बात  — Pgs. ११५ अज्ञेय से ‘अज्ञेय’ तक की यात्रा (त्रिलोक दीप से बातचीत)  — Pgs. ५६१
सम्पराय  — Pgs. ११५ परिशिष्ट
नाता-रिश्ता  — Pgs. ११९ परिशिष्ट-१
ना जाने केहि भेस  — Pgs. ११९ अज्ञेय का जीवन वृ  — Pgs. ५७३
देहरी  — Pgs. १२० परिशिष्ट-२
वासुदेव प्याला  — Pgs. १२१ कृतित्व  — Pgs. ५७८
जरा व्याध  — Pgs. १२२ परिशिष्ट-३
जरा व्याध  — Pgs. १२३ सहायक सामग्री  — Pgs. ५८३
देवासुर  — Pgs. १२५  

 

The Author

SH Vatsyayan Ajneya

स.ही. वात्स्यायन ‘अज्ञेय’(1911-1987)कुशीनगर (देवरिया) में सन् 1911 में जन्म। पहले बारह वर्ष की शिक्षा पिता (डॉ. हीरानन्द शास्‍‍त्री) की देख-रेख में घर ही पर। आगे की पढ़ाई मद्रास और लाहौर में। एम.ए. अंग्रेज़ी में प्रवेश किन्तु तभी देश की आज़ादी के लिए एक गुप्‍त क्रान्तिकारी संगठन में शामिल होना। शिक्षा में बाधा तथा सन् ’30 में बम बनाने के आरोप में गिरफ्तारी। जेल में रह कर ‘चिन्ता’ और ‘शेखरः एक जीवनी’ की रचना। क्रमशः सन् ’36-37 में ‘सैनिक’, ‘विशाल भारत’ का संपादन। सन् ’43 से 46 तक ब्रिटिश सेना में भर्ती। सन् ’47-50 तक ऑल इण्डिया रेडियो में काम। सन् ’43 में ‘तार सप्‍तक’ का प्रवर्तन और संपादन। क्रमशः दूसरे, तीसरे, चौथे सप्‍तक का संपादन। ‘प्रतीक’, ‘दिनमान’, ‘नवभारत टाइम्स’, ‘वाक्’, ‘एवरीमैन’ पत्र-पत्रिकाओं के संपादन से पत्रकारिता में नये प्रतिमानों की सृष्‍टि।
देश-विदेश की अनेक यात्राएँ, जिन से भारतीय सभ्यता की सूक्ष्म पहचान और पकड़, विदेश में भारतीय साहित्य और संस्कृति का अध्यापन। कई राष्‍ट्रीय और अंतरराष्‍ट्रीय सम्मानों से सम्मानित, जिन में ‘भारतीय ज्ञानपीठ’ सन् ’79, यूगोस्लाविया का अंतरराष्‍ट्रीय कविता सम्मान ‘गोल्डन रीथ’ सन् ’83 भी शामिल। सन् ’80 से वत्सल निधि के संस्थापन और संचालन के माध्यम से साहित्य और संस्कृति के बोध निर्माण में कई नये प्रयोग।
अब तक उन्नीस काव्य-संग्रह, एक गीति-नाटक, चार उपन्यास, छः कहानी संग्रह, दो यात्रा संस्मरण, सात निबन्ध संग्रह आदि अनेक कृतियाँ प्रकाशित।

Customers who bought this also bought

WRITE YOUR OWN REVIEW