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"यह पुस्तक भारत की एक विस्मृत परंतु विलक्षण वीरांगना महारानी अबक्का चौटा के अद्भुत जीवन और संघर्ष को पुनः जनमानस के सम्मुख प्रस्तुत करने का एक सशक्त प्रयास है। इतिहास की परतों में दबे उस स्वर्णिम अध्याय को शब्दों के माध्यम से जीवंत किया गया है, जिसमें साहस, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति अद्वितीय निष्ठा की अनुपम मिसाल मिलती है। महारानी अबक्का न केवल विदेशी आक्रांताओं से वीरतापूर्वक लड़ीं, बल्कि एक संगठित सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना की प्रतीक भी रहीं।
यह रचना केवल ऐतिहासिक तथ्यों का संकलन नहीं, बल्कि उस युग की संवेदना, संघर्ष और आत्मगौरव को अनुभूत करने का आमंत्रण है। लेखक का उद्देश्य पाठक को एक ऐसी यात्रा पर ले जाना है, जहाँ वह इतिहास को केवल पढ़े नहीं, बल्कि उसे महसूस भी करे। यह पुस्तक जिज्ञासु मनों में शोध, अन्वेषण और नवलेखन की प्रेरणा जाग्रत् करने का माध्यम बने, यही इसकी सबसे बड़ी सफलता होगी। महारानी अबक्का का तेजस्वी जीवन आज के समय में भी प्रासंगिक है, और यह पुस्तक उस आलोक को पुनर्प्रकाशित करने का विनम्र यत्न है।"