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"यह कहानी है बिहार के ग्रामीण परिवेश, उसकी जमीन और उससे जुड़े लोगों की-तीन पीढ़ियों की नजर से देखा गया बदलता भूमि प्रशासन । दादाजी के अनुभव, तेज के सवाल और परम की जिज्ञासा के साथ, यह पुस्तक हमें बताती है कि जमीन सिर्फ मिट्टी नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति, मेहनत, रिश्तों और भविष्य की नींव है।
तेजी से बदलते समय के बीच यह कहानी हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी जमीन से कितने जुड़े हैं और इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए कैसी छोड़कर जाना चाहते हैं ?"