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"बंगाल केवल एक भूगोल नहीं है। वह विचारों, आंदोलनों, संघर्षों और राजनीतिक प्रयोगों की भूमि है। स्वतंत्रता आंदोलन को दिशा देने वाले इसी बंगाल ने सत्ता और विचारधारा के कई उतार-चढ़ाव देखे। कांग्रेस का दौर; वामपंथ का लंबा शासन; तृणमूल कांग्रेस का उदय; भारतीय जनता पार्टी का विस्तार-हर परिवर्तन ने बंगाल के राजनीतिक मानस पर अपनी गहरी छाप छोड़ी।
के. के. उपाध्याय की पुस्तक 'उत्तिष्ठ बंगाल : एक राजनीतिक क्रांति की अनकही कहानी' इसी लंबी राजनीतिक यात्रा और सन् 2026 में आए सत्ता-परिवर्तन का वृत्तांत है।
उन्होंने लगभग दो वर्ष बंगाल में रहकर इस परिवर्तन को निकट से देखा। सघन प्रवास किया; लोगों से संवाद किया; उनकी बेचैनी, उम्मीदों और बदलते राजनीतिक मन को समझा।
कथा डॉ. श्यामाप्रसाद मुकर्जी की राजनीतिक विरासत से आगे बढ़ती हुई कांग्रेस और वाम मोर्चे के दौर से गुजरती है। फिर परिवर्तन की आशा, उसके बाद उपजे मोहभंग और सन् 2014 के पश्चात् भाजपा के क्रमिक संगठनात्मक विस्तार को दर्ज करती है। इसका सबसे सघन हिस्सा सन् 2026 का विधानसभा चुनाव है। घोषणापत्र की रचना, नेताओं की यात्राएँ, संगठन की रणनीति, अभियान के निर्णायक क्षण। अंततः ब्रिगेड परेड मैदान में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह तक।
आखिर ऐसा क्या बदला कि कभी बंगाल की राजनीति के हाशिए पर दिखाई देने वाला एक दल सत्ता के केंद्र तक पहुँच गया ? कौन सी बेचैनियाँ भीतर-ही-भीतर आकार ले रही थीं ? जनमानस कब और क्यों बदला ? 'उत्तिष्ठ बंगाल' इन्हीं प्रश्नों की पड़ताल है। यह केवल एक चुनाव की कहानी नहीं, एक युग के अवसान और दूसरे राजनीतिक अध्याय के उदय का दस्तावेज है।"