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"फिराक गोरखपुरी ने राजनीति छोड़ने के बाद कहा था कि 'लंद-फंद मेरे वश की बात नहीं।'
इस पुस्तक में फिराक साहब की कहानी आप पढ़ेंगे। साथ ही इसी तरह की करीब पाँच दर्जन सुनी-अनसुनी कहानियाँ भी। ये कहानियाँ आपको बाँधे रखेंगी।
कम लोगों को पता है कि जेपी की शवयात्रा के समय चंद्रशेखर ने उग्र भीड़ से इंदिरा-संजय को बचाया था। पुस्तक में 1962 के फूलपुर लोकसभा चुनाव की भी चर्चा है, जिसके दौरान प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि मैं अपना वोट डॉ. राम मनोहर लोहिया को दूँगा। तब दोनों एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रहे थे।
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के अनुसार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी.एन. अन्नादोरै की शवयात्रा में सर्वाधिक लोग शामिल हुए थे। सन् 1969 की वह कहानी भी आप पढ़ेंगे।
बिहार के रोहतास जिले के डाकू की डायरी भी पुस्तक में दर्ज है। अस्सी के दशक में वह लिखता था।
यह संकलन है सियासत के अनेक जाने-अनजाने प्रसंगों का, जिसमें राजनीतिक मतभेद और अंतर्विरोध के बाद भी एक-दूसरे के प्रति सद्भाव था, आपसी सरोकार थे, मानवीय संवेदना थी। यह आज के दौर की असंवेदनशील राजनीति से इतर सुरभित स्मृतियों से आपका परिचय कराएगी।"