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"अगर सच कहूँ तो मैं मूलतः कवि मन की हूँ। कविताएँ मुझमें ऐसी बसी हैं, जैसे में भी कविता की ही कोई पंक्ति हूँ। किंतु अकसर कहानियाँ भी पुकारती हैं मुझे और अपने मनोहारी रूप से लुभाने लगती हैं। शायद इसलिए कि हमारा जीवन भी तो किसी (परमशक्ति) की लिखी कहानी का अंश मात्र है, जिसे हम सभी अपने-अपने किरदारों के रूप में निभा रहे हैं।
पर कहते हैं न, सब कुछ बदल जाता है किंतु व्यक्ति का स्वभाव नहीं। ऐसे में मेरी कुछ कहानियों में आप कविता की कुछ झलक पा सकते हैं।
इन कहानियों की पीठ पर अगर कभी कविता धप्पा देती हुई दिखाई दे तो इसे सगी बहनों का प्यार मान आप भी मुसकराकर स्वीकार कर लीजिएगा।
बड़ी-बड़ी बातों को कहानियों में ढालने का हुनर मुझे नहीं आता। मैं तो बस छोटे-छोटे ख्वाब, छोटी सी खुशियाँ, छोटे से पल, दुःखों की चंद लड़ियों को अपनी छोटी सी लेखनी में समेटकर शब्दों की सिलाई से कहानियों का स्वेटर बुनती हूँ।
इन्हीं मासूम कहानियों को आपकी प्रतीक्षा है।"