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गौ-पालन में उसके दुग्ध, दुग्ध उत्पाद, गोबर उत्पाद आदि की मात्रा, कीमत, क्वालिटी इत्यादि कभी निश्चित या निर्धारित नहीं होती। वे हर समय, हर जगह तथा हर गौ-पालन केंद्र पर अलग-अलग होती हैं। गौ-पालन में गोबर एक ऐसा उत्सर्जित पदार्थ है, जिसे कूड़े की तरह फेंकने से गौशाला के आस-पास गंदगी, बदबू, मक्खी, मच्छरों तथा कीट-पतंगों का प्रकोप और सरीसृपों के प्रजनन का केंद्र बनकर वह प्रदूषण उत्पादन का केंद्र बन जाता है। गोबर का निस्तारण अच्छे ढंग से करने पर वह उत्तम खाद बनकर खेतों के लिए अच्छा पोषक तथा गौ-पालक की आमदनी का स्रोत बन जाता है।
गौ-पालकों को इस पुस्तक की मानक कीमतों तथा अन्य गणनाओं पर ध्यान न देकर इसमें दिखाए गए नियमों पर ध्यान केंद्रित करके उन्हें अपनाकर गौ-पालन को लाभकारी बनाएँ। यह निश्चित है कि इसमें दिए गए नियमों पर ध्यान देकर तथा लगन व निष्ठा से कार्य करके गौ-पालन को लाभकारी बनाया जा सकता है। इस पुस्तक के लेखन का प्रयास इस आशय के साथ किया गया है कि हम सब लोग जागरूक हो सकें और अपने परिवार, समाज और देश के साथ-साथ हमारे गौ-वंश की रक्षा एवं संवर्धन को भी अपनी प्राथमिकता बनाएँ।